Fake Medicine: देश में नकली दवाओं पर रोकथाम के लिए 300 ब्रांडों पर क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य किया गया है। देश की बड़ी दवा निर्माता कंपनी सन फार्मास्युटिकल्स भी क्यूआर कोड लगाने के लिए तैयार हो गई है। नकली दवाओं से बचने के लिए देश की बड़ी दवा कंपनियों ने अपने 300 ब्रांडों की पैकेजिंग पर क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य कर दिया है। आज 1 अगस्त 2023 से दिखने वाले क्यूआर कोड की सहायतस से अब नकली दवाओं पर लगाम कसी जाएगी। क्यूआर कोड से नकली दवाओं का आसानी से पता चल सकेगा।
ब्रांडों की बैच में पैकेजिंग पर क्यूआर कोड
भारतीय दवा विनिर्माताओं के संगठन(आईडीएमए)के राष्ट्रीय अध्यक्ष विरंची शाह ने बताया कि 1 अगस्त और उसके बाद बनने वाली 300 कंपनियों के ब्रांडों की बैच में पैकेजिंग पर क्यूआर कोड डाले जाएंगे। सरकार के इस कदम का असर एलेग्रा (सनोफी), डोलो (माइक्रो लैब्स), ऑगमेंटिन (जीएसके), एस्थलिन (सिप्ला), लिम्सी (ऐबट), सेरिडॉन (बायर फार्मास्युटिकल्स), कोरेक्स (फाइजर), कालपोल (जीएसके), अनवांटेड 72 (मैनकाइंड फार्मा) और थायरोनॉर्म (ऐबट) जैसे लोकप्रिय दवा ब्रांडों पर पड़ेगा। इन ब्रांडों की दवाएं अधिक मात्रा में बाजार में बिकती हैं और उन्हें सालाना कारोबार या सालाना बिक्री के आधार पर छांटा गया है।
देश की बड़ी दवा कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (आईपीए) महासचिव सुदर्शन जैन ने बताया कि दवा उद्योग इसके लिए तैयार हो गया है। जीएसके के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी इसके लिए तैयार है। इसकी लागत को पहले शामिल कर लिया है। देश की बड़ी दवा निर्माता कंपनी सन फार्मास्युटिकल्स ने इसके लिए तैयार होने की बात कही है।
दवाओं की कीमत 5 से 7 प्रतिशत तक बढ़ेगी
उद्योग सूत्रों ने कहा कि अलग से छपाई के कारण दवाओं की कीमत 5 से 7 प्रतिशत तक बढ़ेगी। इसकी वजह से बैच तैयार होने में देरी होगी। सूत्र ने कहा कि उद्योग राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) को ऐसे मामले में अपनी चिंता पहले बता चुका है। इस बात पर विचार करने का आग्रह किया है कि इससे लागत बढ़ जाएगी और इनमें से अधिकांश दवाएं पहले से मूल्य नियंत्रण के दायरे में हैं। उन्होंने कहा अधिकतर दवा ब्रांड बड़ी कंपनियों के हैं। इसलिए उद्योग में बदलाव लागू करने में देर नहीं लगनी चाहिए।
क्यूआर कोड अनिवार्य किए
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने औषधि विभाग को 300 दवा ब्रांड छांटने के लिए कहा था। जिनके लिए क्यूआर कोड अनिवार्य किए जाए। एनपीपीए ने 300 ब्रांडों की सूची तैयार की। जिनमें खूब उपयोग होने वाली दर्द निवारक, विटामिन, गर्भनिरोधक, मधुमेह और उच्च रक्तचाप की दवाएं शामिल हैं। मंत्रालय ने 14 जून 2022 को अधिसूचना के मसौदे में कहा कि इन फॉर्मूलों से दवा बनाने वाली कंपनियां अपनी प्राथमिक और पैकेजिंग लेबल पर बार कोड या क्यूआर कोड लगाए। जिससे सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन की मदद से पढ़कर असली और नकली दवा के बारे में पता लगाया जा सके।

