लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि, कई जनपदों मे ज्वर और दूसरी बीमारियां भी फैल रही है जिनके इलाज के लिए कोई चिकित्सीय मदद नहीं मिल रही है। प्रदेश की जनता बाढ़ के प्रकोप से त्राहि-त्राहि कर रही है। कोरोना काल की ही तरह सरकार चुप है और लोग भगवान भरोसे हैं।
कहा है कि प्रदेश के दर्जनों जनपदों में नदियां उफान पर हैं। बाढ़ की विभीषिका में फंसे लोग जान-माल की गुहार लगा रहे हैं। तटबंध टूट रहे हैं, सड़क-सम्पर्क मार्ग तेज लहरों के बहाव में ध्वस्त हो रहे हैं, हर ओर तबाही है। बेबस पशु चारा-पानी को तरस रहे हें। बीमारियां फैल रही हैं। उत्तर प्रदेश (भाजपा ) सरकार इस तरफ या तो देखना नहीं चाहती है या देखने की फुर्सत नहीं है, वह आए दिन बस अपनी विज्ञापनी प्रचार उत्सवों के आयोजन में व्यस्त है।
खुद मुख्यमंत्री जी के गृह जनपद गोरखपुर के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। छह प्रमुख नदियां यहां उफान पर हैं। यहां भरवलिया-बसावनपुर रिंग बांध टूट गया है। गोरखपुर-वाराणसी, सोनौली, गोरखपुर-लखनऊ जोड़ने वाली सड़कों पर यातायात बाधित है। कई तटबंध टूट फूट गए हैं। आमी नदी का पानी इंडियन आयल कारपोरेशन के बाटलिंग प्लांट में पानी भर जाने से प्लांट बंद हो गया है।
पहले आंखों पर पट्टी बांधी फ़िर मुझे जला दिया
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज, बलरामपुर, बाराबंकी, सिद्धार्थनगर गोण्डा, गोरखपुर, अयोध्या, रायबरेली, फर्रूखाबाद, कुशीनगर आदि जनपदों में बाढ़ ने ऐसा कहर बरपाया है कि लोग अपने घर-गांव छोड़कर भाग ने में मज़बूर हो रहे हैं।। उन्हें जान बचाना मुश्किल हो रहा है। सैकड़ों गांवों में लोगों के घरों में पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है। सैकड़ों हेक्टेयर फसल नदियों के जल प्रवाह में डूब गई है। बाढ़ ग्रस्त इलाकों में ऐसा कहर बरपा है कि लोग घर की छतों पर या किसी ऊंचे स्थान पर शरण लिए हुए हैं। लोग नावों से ही इधर-उधर जा पा रहे हैं। सबसे बुरी दशा मवेशियों की है। उनकी देखभाल कौन करे जब लोगों का ही कहीं ठिकाना नहीं है।
लखनऊ: वायरल फीवर के बीच फैजुल्लागंज समेत कई इलाकों में जलभराव से हाहाकार
औरतों-बच्चों तथा बूढ़ों को ज्यादा ही परेशानियां उठानी पड़ रही है। भाजपा सरकार ने बाढ़ के हालात पर कोई गम्भीरता नहीं दिखाई है। राहत कार्य अभी तक नहीं चल रहे हैं। बाढ़गस्त इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की सुचारू व्यवस्था नहीं है।

