पौष मास ( Paush Month) का आरंभ सोमवार से, सूर्य उपासना से मिलेगा अद्भुत लाभ

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पौष मास ( Paush Month) का आरंभ सोमवार से, सूर्य उपासना से मिलेगा अद्भुत लाभ

Paush Month – हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 20 दिसंबर 2021 से पौष महीने का आरंभ होने जा रहा है। विक्रम संवत पंचांग के अनुसार साल के दसवे महीने को पौष का महीना ( Paush Month) का आरंभ सोमवार से, सूर्य उपासना से मिलेगा अद्भुत लाभकहा जाता है। इस महीने में चंद्रमा पूर्णिमा के दिन पुष्य नक्षत्र में रहता है। जिसकी वजह से इसे पौष का मास भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में सूर्य देव की उपासना करने से अद्भुत लाभ की प्राप्ति होती है।

ज्योतिषाचार्य डॉ अनीस व्यास बताते हैं कि इस महीने में सूर्य देव की उपासना अत्यंत महत्व है। उनका भग नाम से पूजन करना फल की प्राप्ति दिलाता है। शास्त्रों में यश, श्री, ज्ञान, धर्म और वैराग्य को भग कहा गया है। इस महीने में सूर्य देव का गोचर धनु राशि में होता है। बृहस्पति देव इस राशि के स्वामी माने गए हैं। माना जाता है कि देवताओं सहित सभी मनुष्यों को गुरुदेव बृहस्पति इस समय ज्ञान देते हैं। ऐसे लोग जिनका सूर्य अशुभ फल प्रदान करता हो या कमजोर हो उन्हें इस मास में सूर्य उपासना करनी चाहिए। इस महीने में गर्म वस्त्रों के साथ ही अन्न, भोजन का दान भी करना चाहिए। घर में कपूर की सुगंध लगाने से मनुष्य का स्वास्थ्य भी अच्छा होता है।

नहीं करने चाहिए मांगलिक कार्य
पौष के महीने ( Paush Month) का आरंभ सोमवार से, सूर्य उपासना से मिलेगा अद्भुत लाभमें सूर्य का प्रवेश धनु राशि में होता है और सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं। इस महीने को धनु मास भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। उनका लाभ नहीं मिलता है। इसका पुराणों में भी उल्लेख है। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस महीने में पिंडदान का महत्व भी बढ़ जाता है। वह बताते हैं कि शास्त्रों के अनुसार जिन पूर्वजों का पिंडदान इस महीने में किया जाता है उन्हें तुरंत ही बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।

भीष्म पितामह ने किया था पौष का इंतज़ार
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि द्वापर युग में महाभारत युद्ध के दौरान भीष्म पिता पूरी तरह घायल हो गए थे। अर्जुन के तीरों से घायल हो गए। भीष्म पितामह सूर्य दक्षिणायन होने की वजह से प्राण नहीं त्याग रहे थे। उन्होंने भी मृत्यु के लिए सूर्य की उत्तरायण होने का इंतजार किया। जब यह महीना आया तो भीष्म पिता ने श्री कृष्ण की वंदना की और इसी पौष के महीने ( Paush Month) का आरंभ सोमवार से, सूर्य उपासना से मिलेगा अद्भुत लाभमें अंतिम सांस ली। माना जाता है कि उन्हें मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्त हुआ। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि सूर्य के उत्तरायण होने पर, जो व्यक्ति शुक्ल पक्ष में, दिन के उजाले में अपने प्राण त्यागता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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