मेरठ में सरकारी और प्राइवेट रिपोर्ट को लेकर परेशान है गर्भवती महिला
मेरठ। एक ही मरीज की दो कोरोना जांच रिपोर्ट, सरकारी में पाॅजिटिव तो प्राइवेट जांच में रिपोर्ट नेगेटिव आई। अब जांच कराने वाली गर्भवती महिला परेशान है कि वह किस रिपोर्ट को सही माने। वहीं सरकारी जांच में महिला की रिपोर्ट पाॅजिटिव आने के बाद स्वास्थ विभाग की टीम ने घर पर आकर परिवार वालों के सैंपल क्या लिये पूरे मोहल्ले ने महिला और उसके परिवार से दूरी बना ली। अब महिला का प्रसव कभी भी हो सकता है और स्वास्थ विभाग के अधिकारी जांच कराने की बात कह रहे हैं। गर्भवती महिला और उनका परिवार परेशान है कि जाये तो जाये कहां, आखिर किससे करे शिकायत।
रेलवे रोड थाना क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि उनकी बेटी नौ माह की गर्भवती है और उसकी ससुराल माधवपुरम में है। महिला चिकित्सक के कहने पर उन्होंने 12 अप्रैल को जिला अस्पताल में कोरोना जांच कराई। यह रिपोर्ट 15 अप्रैल को आयी जिसमें उनकी बेटी को कोरोना संक्रमित बताया गया था। बेटी में कोरोना के कोई लक्षण न दिखने पर उन्होंने 16 अप्रैल को एक निजी लैब में जांच कराई तो बेटी की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई।
उन्होंने स्वास्थ विभाग को दोनो रिपोर्ट में आने वाले अंतर के बार में बताया तो कोई संतोषजनक जवाब तो मिला नहीं बल्कि सुबह की स्वास्थ विभाग की टीम उनके परिवार की कोेरोना जांच के लिये सैंपल लेने के लिये घर आ गयी। अब मोहल्ले के लोगों ने भी उनसे दूरी बना ली है। इधर गर्भवती बेटी का प्रसव किसी भी समय हो सकता है। परेशान हाल पिता, चिंतित गर्भवती बेटी और असहाय महसूस कर रहे परिवार को यह समझ नहीं आ रहा कि वह किसे सही समझे और किसके पास जाकर गुहार लगाये।
शिकायत पर संज्ञान लिया जायेगा
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अखिलेश मोहन ने शिकायत पर संज्ञान लेने की बात जरूर कही है लेकिन उनके आश्वासन से परिवार को राहत मिलती नहीं दिख रही। खुद सीएमओ का कहना है कि यदि एक ही दिन की दोनों रिपोर्ट पाॅजिटिव और नेगेटिव आतीं तो किसी जांच में कमी होने की बात हो सकती थी। मगर चार दिन बाद दोबारा जांच में ऐसा हो सकता है। सरकारी और प्राइवेट लैब पर सैंपल लेने की प्रक्रिया का भी फर्क हो सकता है। फिर भी मामले की जांच कराई जायेगी।

