पाराशर धाम – जहां आज भी रात में बरसता है चंदन, यही लिखे गए थे कई पुराण

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पाराशर धाम – जहां आज भी रात में बरसता है चंदन, यही लिखे गए थे कई पुराण

राजस्थान के अलवर जिले में अरावली पर्वत श्रृंखला के बीच में स्थित इस स्थान पर आज भी अखंड यज्ञ कुंड है प्रज्ज्वलित

राजस्थान को देवी देवताओं की स्थली भी माना गया है। यहां की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अनेक ऋषि-मुनियों ने पहाड़ों के बीच में तप किए हैं। यह आज भी कई ऐसे दुर्गम स्थल मौजूद है। जो पहले कभी ऋषि मुनियों के तपोस्थली रही है। इन्हीं में से एक है ऋषि पाराशर की तपोस्थली- पाराशर धाम। राजस्थान के अलवर जिले में स्थित टहला गांव से करीब 13 किलोमीटर दूर अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के बीच में यह धाम स्थित है। पर्वतों के बीच में स्थित यह धाम आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा प्रतीक माना जाता है। प्राचीन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि वशिष्ठ के पुत्र शक्ति मुनि की हत्या राक्षसों ने की थी। उनके हत्यारों के संपूर्ण नाश के लिए इस क्षेत्र में राक्षस नाशक यज्ञ किया गया था। इस दुर्गम स्थल पर आज भी अखंड यज्ञ कुंड प्रज्वलित है। माना जाता है कि यह वही कुंड है जहां राक्षसों के नाश के लिए यज्ञ किया गया था।

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पुराणों की हुई थी रचना

कई पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस स्थल पर महर्षि पाराशर ने फलित खगोल गणना, गणित ज्योतिष, जैसे ग्रंथों की रचना की थी। यही नहीं यह भी माना जाता है कि महर्षि वशिष्ठ व महर्षि पुलत्स्य ने ऋषि पाराशर से विष्णु पुराण लिखने का आग्रह किया था जिसके बाद ऋषि पाराशर ने इसी धाम पर विष्णु पुराण की भी रचना भी की थी। ऋषि पाराशर ने चारों वेद, सूर्य गणना, ज्योतिष सूर्य विज्ञान आदि का ज्ञान यही प्रदान किया था।

मानी जाती है कर्ण की दाह संस्कार भूमि

पाराशर धाम दुर्गम और वन क्षेत्र में स्थित है। महर्षि पाराशर के पुत्र वेदव्यास ने महाभारत में लिखा है कि दानवीर कर्ण का शव दाह भी इसी जगह पर किया गया था। यही नहीं इसके प्रमाण भी इस जगह पर मिलते हैं। मान्यता है की कर्ण को वरदान था कि उनका दाह संस्कार जमीन पर नहीं होगा। जिसके चलते उनका संस्कार खोह पर्वत के मध्य में हुआ था। कहा जाता है कि है पर्वत आज भी उस जगह से जला हुआ दिखाई पड़ता है। इस दुर्गम स्थल पर प्राचीन समय के वट वृक्ष की जड़ें आज भी मौजूद है। इस धाम में अष्टमी, एकादशी, पूर्णिमा, सावन मास में विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। साथ ही भक्तों का तांता भी लगता है।

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बरसता है चंदन

पाराशर धाम पहुंचने पर यहां अद्भुत अलौकिक और दैवीय अनुभूति होती है। आसपास चारों ओर असीम शांति और मधुर वातावरण फैला हुआ है। यहाँ वन्यजीव बंदर, लंगूर और मोर चारों ओर दिखाई पड़ते हैं। यहां के मूल निवासी बताते हैं कि यह स्थान अत्यंत शांत और पवित्र है। यह भी मान्यता है कि यहां रात में पीले रंग की बूंदों की बरसात होती है। जो बिल्कुल चंदन के समान लगती है। सुबह सवेरे कई लोगों ने प्राकृतिक कुंड व पाराशर तपोस्थली की सीढ़ियों पर इन्हें देखा भी है। यह भी मान्यता है कि महर्षि पाराशर हर वर्ष यज्ञ स्थल पर एक बार अवश्य आते हैं।

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