देहरादून। पेपर लीक मामले का मास्टरमाइंड हाकम सिंह नकल कराने का पुराना खिलाड़ी बताया जा रहा है। उसने बड़े शातिराना ढंग से उत्तराखंड ही नहीं बल्कि सीमा क्षेत्र के यूपी के बिजनौर जिले के ग्रामीण इलाके में किराये के एक मकान को नकल का सेंटर बनाया था। बताया जाता है कि अभ्यर्थियों को इसी मकान में ले जाकर हल किया हुआ पेपर मुहैया कराया था। पेपर लीक मामले में हिरासत में लिए जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह के खिलाफ पहले भी मंगलौर थाने में एक मुकदमा दर्ज कराया गया था। यह मुकदमा भी आयोग की एक परीक्षा में नकल से संबंधित बताया जाता था। यह परीक्षा कनिष्ठ सहायक पद पर भर्ती की थी। उस दौरान भी आरोप था कि उसने कई परीक्षार्थियों को नकल कराई थी। लेकिन वह बेहद चालाकी से इस मामले में बच निकला था।
उस दौरान पुलिस को सबूत मिले नहीं या लिए नहीं, यह तो पता नहीं चल सका लेकिन अंतिम रिपोर्ट लगाकर उस दौरान मामला बंद कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि इस मामले में एसटीएफ के पास पुख्ता सुबूत हैं। सूत्रों के अनुसार उसने बिजनौर के नगीना में एक गांव में स्थित मकान को नकल के सेंटर के रूप में किराए पर लिया जिससे यदि पुलिस तक बात पहुंचे तो उसकी लोकेशन परीक्षा वाले सेंटरों से अलग ही मिले। परीक्षा का बिजनौर से कोई लेनादेना नहीं था। ऐसे में यदि लोकेशन मिलती तो बिजनौर की और वह ग्रामीण इलाके की। बिजनौर का ये इलाका कुमाऊं और गढ़वाल के बीच में है। ऐसे में उसे यह दिखाने में आसानी होती कि वह सफर में था, लेकिन इस बार उसका सामना एसटीएफ से पड़ा था तो हाकम सिंह की यह चाल यहाँ फेल हो गई। हाकम सिंह ने यह मकान परीक्षा के पांच दिन पहले किराये पर लिया था। परीक्षा दो दिनों तक हुई थी। यहीं पर अभ्यर्थी आते और नकल का पर्चा देखकर परीक्षा देने चले जाते। ऐसा दो दिनों तक चलता रहा। परीक्षा समाप्त हुई तो हाकम सिंह ने किराए के मकान को एक दिन बाद छोड़ दिया। बताया जाता है कि यहां पर 20 से ज्यादा लोगों को नकल कराई गई। इन सब के नाम का पता किया जा रहा है।

