नई दिल्ली। दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला का सुबह निधन हो गया। झुनझुनवाला ने सुबह 6ः45 बजे मुंबई के कैंडी ब्रीच अस्पताल में अंतिम सांस ली। झुनझुनवाला शेयर बाजार के बेताज बादशाह कहे जाते थे। निवेश के क्षेत्र में झुनझुनवाला की धाक इतनी थी कि उन्हें देश का वॉरेन बफेट कहा जाता था। दुनियाभर में शेयर बाजार में झुनझुनवाला की पैनी नजर रहती थी। कई बार बाजार में उठापठक की आंधी के बीच उन्होंने जिस तरह से व्यापार को संभाला उससे सभी हैरान रह जाते थे। शेयर बाजार के धड़ाम होने पर जहां निवेशक बाजार छोड़कर भाग जाते थे। वहीं राकेश झुनझुनवाला बिल्कुल नहीं घबराते थे। उन्हें शेयर बाजार का बिग बुल कहा जाता था। झुनझुनवाला के बारे में कहा जाता था कि अगर वो मिट्टी को छू लें तो सोना बन जाती है।
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राकेश झुनझुनवाला ने निवेश बाजार में 1985 में कदम रखा। इस दौरान उन्होंने पांच हजार रुपये से निवेश शुरु किया था। आज उनकी नेटवर्थ 40 हजार करोड़ रुपये की है। झुनझुनवाला ने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट से सीए डिग्री भी ली थी। बताया जाता है कि शेयर बाजार में झुनझुनवाला की दिलचस्पी उनके पिता के कारण हुई। उनके पिता टैक्स अधिकारी थे। उनके पिता अपने दोस्तों के साथ शेयर बाजार की बातें करते थे। झुनझुनवाला पिता की बातें सुनते थे। इसके बाद से झुनझुनवाला ने दलाल स्ट्रीट को समझा और यहीं से उन्होंने निवेश की दुनिया में उड़ान भरनी शुरू की। उन्हें जब लाभ होने लगा तो पक्का यकीन भी हुआ कि अगर कहीं से बड़ा पैसा बनाया जा सकता है तो वह सिर्फ यही जगह है। झुनझुनवाला शुरू से जोखिम लेने वाले थे। 1986 में, उन्होंने अपना पहला महत्वपूर्ण लाभ उस समय कमाया जब उन्होंने 43 रुपये में टाटा टी के 5,000 शेयर खरीदे और तीन महीने के भीतर स्टॉक बढ़कर 143 रुपये का हो गया। झुनझुनवाला ने अपने रुपये से तीन गुना से अधिक कमा लिया। उन्होंने तीन साल में 25 लाख रुपये कमाए।

