नागरिकता संशोधन कानून भारत में लागू हो गया है, सरकार इसके समर्थन में प्रचार कर रही है वहीँ विपक्ष विरोध में लेकिन विपक्ष का विरोध इसलिए नहीं है कि तीन देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से भारत आने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को नागरिकता दी जाएगी, अधिकांश तौर पर (आम आदमी पार्टी को छोड़कर) विपक्ष का विरोध इस बात पर है कि ये कानून धार्मिक भेदभाव करता है. विपक्ष का कहना है प्रताड़ित किसी भी धर्म का हो, उसे सरकार नागरिकता दे, मुसलमानों को हटाकर बाकी लोगों को नागरिकता देने की बात सही नहीं है, वहीँ आम आदमी पार्टी का सवाल दूसरा है, AAP संयोजक केजरीवाल का कहना है कि तीन देशों में लगभग तीन करोड़ लोग धार्मिक तौर पर अल्पसंख्यक हैं, ऐसे में सरकार देश में इन्हें कहाँ रखेगी। खैर चुनावी मौसम में है तो बयानबाज़ी भी होगी लेकिन CAA को लेकर अब पाकिस्तान और अमेरिका से भी बयान जारी किये गए हैं।
पाकिस्तान ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा है कि भारत CAA के बहाने पाकिस्तान को बदनाम करना चाहता है, वहीँ अमेरिका ने भी CAA कानून को लेकर चिंता जताई है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलोच ने बयान जारी कर कहा है कि CAA के बहाने भारत दुनिया को बताना चाहता है कि वहां अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होता है. CAA कानून को धर्म के आधार पर लोगों को बांटने वाला बताते हुए ज़हरा बलोच ने कहा कि पाकिस्तान में हर माइनॉरिटी पूरी तरह सुरक्षित है. ज़हरा बलोच ने कहा कि भारत की सरकार इस कानून की मदद से चुनाव जीतना चाहती है इसलिए चुनाव से ठीक पहले इस कानून को लागू करके वो राजनीतिक ध्रूवीकरण करने की कोशिश कर रही है.
वहीँ सीएए का नोटिफिकेशन जारी के होने के बाद अमेरिका ने अपनी प्रतिक्रिया में CAA नोटिफिकेशन को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि वो इस पर नजर रखे हुए है. अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा कि 11 मार्च को भारत में CAA का नोटिफिकेशन जारी किया, जिसे लेकर अमरीका चिंतित है और करीब से नजर रखे हुए है. अमरीका देख रहा है CAA कानून को किस तरह से लागू किया जाएगा. मैथ्यू मिलर ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करना और कानून के तहत सभी समुदायों के साथ एक जैसा बर्ताव करना लोकतंत्र का मूलभूत सिद्धांत है.

