टीम इंडिया ने अनाधिकारिक रूप मिशन टी-20 वर्ल्ड कप का आगाज़ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए दो वार्म अप मैचों से कर चुकी है, इनमें से एक में जीत और एक में हार मिली है, आधिकारिक शुरुआत 17 अक्टूबर को होगी जब भारत की टीम ऑस्ट्रेलिया से मुकाबला करेगी और फिर 19 अक्टूबर को उसका मुकाबला न्यूज़ीलैण्ड से होगा। इसके बाद शुरू होगा उसका मिशन मेलबोर्न जहाँ उसका पहला मुकाबला ही अपने चिरप्रतिद्वंदी पाकिस्तान से होगा। इस बड़े मुकाबले के लिए दोनों ही टीमें कमर कसे हुए हैं. पाकिस्तान की टीम के भी हौसले बुलंद है क्योंकि आज ही उसने त्रिकोणीय श्रंखला जीती है और उसके लिए दूसरी सबसे बड़ी बात शाहीन शाह आफरीदी का ऑस्ट्रेलिया पहुंचना है जहाँ वो 15 अक्टूबर को टीम से जुड़ जायेंगे वहीँ टीम इंडिया अभी भी बुमराह के विकल्प पर अंतिम निर्णय नहीं कर पायी है. इन सबके बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि पाकिस्तान टीम से शाहीन आफरीदी का जुड़ना और टीम इंडिया में बुमराह का न होना 23 अक्टूबर को होने वाले महामुकाबले पर कितना असर डाल सकता है.
जहाँ तक बुमराह की बात है तो उनके गैरमौजूदगी से पाकिस्तानी खेमा बहुत खुश होगा क्योंकि उन्हें बुमराह का महत्त्व मालूम है, पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ी इसे टीम के लिए एक तोहफे के रूप में देख रहे हैं लेकिन वो शायद यह भूल रहे हैं कि उनका यह दांव उल्टा भी पड़ सकता है. शाहीन आफरीदी लगभग ढाई महीनों से क्रिकेट से दूर है, उनके घुटने में चोट लगी थी और उसका इंग्लैंड में इलाज चल रहा था जहाँ इलाज के बाद वहीँ पर उनका रिहैब भी हुआ, शाहीन ने कुछ नेट प्रैक्टिस ज़रूर की है लेकिन क्या वो वाकई मैच फिट हैं, क्या इतने दिनों बाद सीधे मैच में उतरकर वो भारत के खिलाफ पहले जैसा प्रदर्शन कर पाएंगे।
भूलना नहीं चाहिए कि एक तेज़ गेंदबाज़ के लिए घुटने की चोट सबसे गंभीर मानी जाती है, चोट से उबरने के बाद भी पुरानी लय मिल पायेगी इसमें हमेशा शंका बनी रहती है. भारत-पाक जैसे प्रेशर मैच में हर गेंदबाज़ को अपने बेस्ट देना होता है तो इस बात में पूरी तरह डाउट है कि शाहीन आफरीदी चमकेंगे ही, भारतीय बल्लेबाज़ उनकी वो चमक उतार भी सकते हैं जो उन्होंने पिछले विश्व कप में बिखेरी थी, वैसे भी भारत के बल्लेबाज़ हिसाब बराबर करने में उस्ताद माने जाते हैं. इसलिए शाहीन को लेकर पाकिस्तान को ज़्यादा खुश होने की ज़रुरत नहीं है, हाँ बुमराह की कमी टीम इंडिया को ज़रूर खल रही है. यह बात पिछले कुछ मैचों में सामने भी आ चुकी है कि भारतीय तेज़ गेंदबाज़ डेथ ओवरों में रन लुटवा रहे हैं. बुमराह के होने से इस पर आराम से लगाम लग जाती थी क्योंकि आम तौर पर 18 वां और बीसवां ओवर करने वाले बुमराह न सिर्फ रन रेट को ज़्यादा बढ़ने नहीं देते थे बल्कि विकटें भी चटका देते थे.

