- चुनाव आयोग का तीन दिवसीय यूपी दौरा, सभी दलों ने दिखाई समय पर चुनाव कराने की चाहत
ऊषा सिंह
केंद्रीय चुनाव आयोग की टीम तीन दिन के यूपी दौरे पर है। पहले दिन ही सभी राजनीतिक दलों से आयोग ने मुलाकात की। इस दौरान एक बात पर सभी दल सहमत दिखे कि विधान सभा चुनाव तय समय पर होना चाहिए। वहीं विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोला। चुनाव आचार संहिता का ठीक से पालन कराने, सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग रोकने और चुनावी सभाओं को लेकर कोविड प्रोटोकॉल के पालन में भेदभाव रोकने जैसे मुद्दे उठाए। वहीं भाजपा ने अपना पुराना बुरका राग अलापा। भाजपा ने कहा कि बुरके में महिलाओं की ठीक से पहचान नहीं हो पाती।
सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग रुके : सपा
मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चद्रा की अगुवाई में चुनाव आयोग की टीम लखनऊ पहुंची। सभी विपक्षी दलों को 10-10 मिनट का समय अपनी बात रखने के लिए दिया गया। सपा ने कहा कि 80 साल से अधिक उम्र के और दिव्यांग वोटरों की बूथवार लिस्ट दी जाए। संवेदनशील केंद्रों की भी विधान सभावार सूची उपलबध कराने की मांग सपा ने की। इसके लआवा भाजपा की सभाओं में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग रोकने और प्रत्याशी की मांग पर वीवीपैट पर्ची की गणना करने की बात आयोग के समक्ष रखी।
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केंद्रीय बलों की निगरानी में हो चुनाव :कांग्रेस
कांग्रेस ने केंद्रीय सुरक्षा बलों की देखरेख में चुनाव कराने की मांग की। कहा कि यूपी पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। वहीं कुछ ऐसे सरकारी अफसरों को चुनाव से अलग करने की मांग की जो सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं। कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने और उसमें किसी तरह का भेदभाव न करने की मांग भी कांग्रेस ने रखी।
आचार संहिता उल्लंघन पर हो सख्त कार्रवाई : बसपा
बसपा ने समय पर ही चुनाव कराने की मांग की और कहा कि इसमें किसी तरह की अड़चन पैदा न हो। भयमुक्त माहौल में वोट डालने के इंतजाम करने, आचार संहिता का सख्ती से पालन कराने और उल्लंघन पर ठोस कार्रवाई की मांग की। भाजपा और अन्य पार्टियों की रैलियों और रोड शो में आचार संहिता के खुले उल्लंघन को स्तब्ध करने वाला बताया।
संविधान विरोधी बयानों पर रोक लगे : आरएलडी
आरएलडी ने सरकार में बड़े पदों पर बैठे लोगों की संविधान विरोधी बातों पर रोक लगाने की मांग कर डाली। जनता के मुद्दे उठाने और भेदभाव वाले सांप्रदायिक व जातिवादी मुद्दों पर रोक लगाने की भी मांग आरएलडी ने की। चुनाीव प्रक्रिया को कम खर्चीला बनाने और पोलिंग एजेंटों के अलावा अन्य किसी को मतदान केंद्रों पर प्रवेश की अनुमति न देने की बात पार्टी ने कही।
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बुरके वालियों की पहचान का इंतजाम हो : भाजपा
भाजपा को सबसे ज्यादा आपत्ति मुस्लिम महिलाओं के बुरके को लेकर थी। पार्टी ने मांग रखी की पर्याप्त संख्या में महिला कर्मियों की तैनाती की मांग की। कहा कि बुरके में महिलाओं की पहचान करना मुश्किल होता है। भाजपा ने यह मांग पहली बार नहीं रखी है। यूपी के पिछले विधान सभा चुनाव में भी भाजपा ने यह मांग आयोग से की थी। आयोग ने यह कहकर मांग ठुकरा दी थी कि एक महिला कर्मचारी की तैनाती हर बूथ पर होती है। इसके अलावा स्थानीय पोलिंग एजेंट होते हैं। वे ज्यादातर पहचानते हैं।

