उत्तर प्रदेश की राजनीति के भी अजीब रंग हैं, कल का दोस्त ऐसा दुश्मन बन जाता है कि उसके घर आने पर भी पाबन्दी लग जाती है. सुभासपा-प्रमुख ओपी राजभर और अखिलेश की जुगलबंदी विधानसभा चुनावों के दौरान खूब चर्चित रही लेकिन चुनाव बाद विपरीत नतीजे आने पर दोनों के बीच अलगाव हो गया. चुनाव के समय ओपी राजभर को दी गयी फॉर्चूनर कार भी सपा ने उनसे वापस ले ली और अब सपा दफ्तर के बाहर एक बैनर लगा है जिसमें लिखा है कि सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर का समाजवादी पार्टी कार्यालय में प्रवेश प्रतिबंधित है.
सुभासपा ने बताया सपा की हताशा
इस पोस्टर के वायरल होने के बाद अब सुभासपा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है और इसे समाजवादी पार्टी की हताशा बताया है. सुभासपा प्रवक्ता अरुण राजभर ने कहा है कि हाईकोर्ट के निर्णय के बाद प्रदेश में OBC का मामला गरमा गया है, सपा को मालूम है कि ओपी राजभर के सपा से अलग होने के बाद अब इस समुदाय के साथ दलित और मुसलमान अखिलेश से दूर होता जा रहा है, यह बैनर उसी हताशा का नमूना है. उन्हें मालूम है कि पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग ओपी राजभर के साथ खड़ा है.
OBC नेताओं का सपाइयों ने किया अपमान
सुभासपा प्रवक्ता का खाना है कि समाजवादी ने पानी हर सरकार में इस वर्ग की अनदेखी की. अपनी सत्ता के दौरान सपा नेता OBC वर्ग के नेताओं का अपमान करते थे, उनकी ज़मीनों पर कब्ज़ा करते थे, सपा ने कभी भी अपने संगठन में अति पिछड़ी जातियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया। अरुण राजभर ने कहा कि अब वो OBC मुद्दे पर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं, आने वाले लोकसभा चुनाव में यह वर्ग इन्हें सबक सिखाएगा।

