मरने के 6 महीने बाद स्वास्थ्य विभाग ने लगाई पार्षद को दूसरी डोज़
पारुल सिंघल
मेरठ। हाल ही में कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए लगाई जा रही वैक्सीन का आंकड़ा 100 करोड़ पार होने का जश्न सरकार पूरे जोर शोर से मना रही है। बड़े-बड़े होर्डिंग्स, विज्ञापन, यहां तक की मोबाइल की कॉलर ट्यून के जरिये 100 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाने के आंकड़ों का ढोल पीटा जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ इस आंकड़े की पोल खोलता एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां दिवंगत पार्षद को मरने के 6 महीने बाद कोरोना वायरस वैक्सीन की दूसरी डोज लगा दी गई। यही नहीं वैक्सिनेशन का सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया। यह बात जब दिवंगत पार्षद के परिवार को पता चली और उन्होंने इस बाबत अधिकारियों को सूचित किया तो स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारी कुछ भी जवाब देने की स्थिति में नजर नहीं आए।
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ये है मामला
100 करोड़ वैक्सीनेशन की पोल खोलता यह मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में सामने आया है इसके तहत कैंट बोर्ड की पार्षद मंजू गोयल का बीते 25 अप्रैल को कोरोना के चलते निधन हो गया था। उनकी मौत के 6 महीने बाद बीते शुक्रवार को अचानक उनके मोबाइल पर कोविड वैक्सीन की दूसरी डोज़ लगने का मैसेज आया। ये मैसेज देख उनके परिवार में खलबली मच गई। स्वजनों ने बताया कि 20 मार्च 2021 को दिवंगत पार्षद को कोविशील्ड की पहली डोज़ दी गई थी। दूसरी डोज़ का समय आने से पहले ही उनकी मौत हो गयी थी। स्वजनों ने बताया कि करीब 12 बजकर 9 मिनट पर मोबाइल पर दूसरी डोज़ लगने का मैसेज आया था। यही नहीं पोर्टल पर इसका सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया था।
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अधिकारी अनभिज्ञ
दिवंगत पार्षद को मौत के बाद टीका लगने का मामला तेजी से फैल गया। इस बाबत जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से पूछा गया तो उन्होंने इसको लेकर अनभिज्ञता जताई। सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि इस तरह के का मामला काफी खेद जनक है। इसकी जांच करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि मरने के बाद किसी भी व्यक्ति को दूसरा टीका नहीं लगाया जा सकता है। यह गड़बड़ी कैसे हुई और दूसरा टीका लगने का मैसेज कैसे जनरेट हुआ इसकी जांच के लिए टीम गठित की गई है। इस संबंध में जांच करवाई जा रही है। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। वहीं दिवंगत पार्षद के परिवार जनों का कहना है कि यह सरकार को बदनाम करने की साजिश है। सरकार बहुत अच्छे से काम कर रही है।

