उमर अब्दुल्ला ने इस बात के लिए अमित शाह को सराहा

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उमर ने कहा कि हालांकि गृह मंत्री ने केवल एक पैराग्राफ पर ध्यान केंद्रित किया, लेकिन उन्होंने सभी को हमारा घोषणापत्र पढ़ने के लिए मजबूर कर दिया। उमर की यह टिप्पणी शाह द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी से दस सवाल पूछे जाने और कांग्रेस और एनसी के बीच चुनावी गठबंधन के कारण विभिन्न मुद्दों पर पार्टी से स्पष्टीकरण मांगने के बाद आई है। उमर ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि सवाल उठाए गए हैं कि अगर एनसी-कांग्रेस गठबंधन सत्ता में आता है तो श्रीनगर में कुछ धार्मिक स्थलों के नाम बदल दिए जाएंगे।

बता दें कि गठबंधन को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने “सत्ता के लालच को शांत करने के लिए बार-बार देश की एकता और सुरक्षा को जोखिम में डाला है।” अमित शाह ने अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली के एनसी के वादे पर कांग्रेस के रुख पर भी सवाल उठाए।

प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी द्वारा विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवारों को निर्दलीय के रूप में मैदान में उतारने की योजना की खबरों पर टिप्पणी करते हुए उमर ने कहा, “लोकतंत्र का सबसे अच्छा हिस्सा यह है कि कोई भी चुनाव लड़ सकता है।” जमात जम्मू-कश्मीर में चुनावों की घोषणा से पहले अपने ऊपर लगे प्रतिबंध को हटाने की कोशिश कर रही थी। हालांकि ऐसा नहीं हुआ और अब खबरें हैं कि वे निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ेंगे। सरकार ने 2019 में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत जमात पर पांच साल की अवधि के लिए प्रतिबंध लगा दिया था। इससे पहले गंदेरबल में एक समारोह में बोलते हुए उमर ने कहा, “हमारे विरोधियों ने हमें विभाजित किया, हमारी आवाज को कमजोर किया। अगर हम एकजुट रहते, तो हमारे पास अभी भी अपना झंडा और विशेष दर्जा होता।

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