मीडिया से मायावती की नाराजगी की क्या है वजह? इसलिए प्रवक्ताओं पर लगाई रोक

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मीडिया से मायावती की नाराजगी की क्या है वजह? इसलिए प्रवक्ताओं पर लगाई रोक

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मुखिया मायावती ने यूपी चुनाव में मिली करारी हार के बाद अपने प्रवक्ताओं को मीडिया डिबेट में भाग लेने से रोक लगा दिया है। उन्होंने मीडिया पर भी अपनी भड़ास निकाली है। इसके पहले मायावती ने कहा था कि मुसलमान समाज ने उनको वोट नहीं किया अन्यथा भाजपा (BJP) को सत्ता में आने से वो रोक देतीं। हालांकि, उन्होंने यह दावा भी किया है कि भाजपा को सिर्फ बसपा ही रोक सकती है। इसके अलावा मायावती ने सांगठनिक फेरबदल के भी संकेत दिये हैं।

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मायावती ने शनिवार को ट्विट किया कि ‘यूपी विधानसभा (UP election 2022) आमचुनाव के दौरान मीडिया द्वारा अपने आक़ाओं के दिशा-निर्देशन में जो जातिवादी द्वेषपूर्ण व घृणित रवैया अपनाकर अम्बेडकरवादी बीएसपी मूवमेन्ट को नुकसान पहुंचाने का काम किया गया है वह किसी से भी छिपा नहीं है। इस हालत में पार्टी प्रवक्ताओं को भी नई जिम्मेदारी दी जाएगी।’ उन्होंने एक और ट्वीट किया कि ‘इसलिए पार्टी के सभी प्रवक्ता सुधीन्द्र भदौरिया, धर्मवीर चौधरी, डा. एम एच खान, फैजान खान व सीमा कुशवाहा अब टीवी डिबेट आदि कार्यक्रमों में शामिल नहीं होंगे।’ मायावती इससे पहले भी मीडिया पर आरोप लगा चुकीं हैं।

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मायावती की नाराजगी की यह है वजह
मायावती (Mayawati) की मीडिया से नाराजगी पहली बार नहीं है। इसके पहले भी वह अपनी नाराजगी दिखाती आईं हैं। बसपा के संस्थापक कांशीराम भी मीडिया से दूरी बनाकर रहते थे। हालांकि इस बार के चुनाव को देखते हुए मीडिया को-ऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी राज्यसभा सांसद सतीश मिश्र को दी थी। जिसके बाद आधिकारिक तौर पर सुधींद्र भदौरिया, धर्मवीर चौधरी, डॉ. एम एच खान, फैजान खान को शामिल किया गया था। उसके बाद दिल्ली गैंगरेप पीड़िता को न्याय दिलाने वाली और हाथरस की बिटिया का केस देख रहीं सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) की वकील सीमा समृद्धि कुशवाहा ने भी बसपा का दामन थामा था। उनको भी मीडिया पैनलिस्ट के तौर पर जिम्मेदारी दी गई थी। इस बीच चुनाव के ठीक पहले मायावती के एक पुराने बयान को बार-बार दिखाया जाने लगा था। जिसमें वो सपा को हराने के लिए भाजपा को वोट करने की बात कहती दिख रहीं हैं। इसके अलावा मायावती की नाराजगी इस बात को भी लेकर थी कि मीडिया शुरूआत से ही बसपा को यूपी की लड़ाई से बाहर दिखा रहा था। जिसको लेकर मायावती पहले भी निशाना साध चुकीं हैं।

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