Manipur violence: मणिपुर में पिछले एक महीने से हिंसा जारी है। सुरक्षाबलों ने प्रदेश की जनता की सुरक्षा के लिए उग्रवादियों को जिंदा छोड़ दिया और जब्त हथियार लेकर वापस लौट गए। भारतीय सेना के अधिकारी ने आज रविवार को बताया कि कांगलेई यावोल कन्ना लुप KYKL मैतेई उग्रवादी गुट है। कई हमलों में इस गुट का नाम सामने आया। सूचना मिली कि इथम गांव में आतकंवादी छिपे हैं। इसको लेकर, शनिवार को इथम गांव में पूरे दिन गतिरोध चला। गांव में KYKL के एक दर्जन आतंकी छिपे थे। जिसमें स्वयंभू लेफ्टिनेंट कर्नल मोइरांगथेम तंबा उर्फ उत्तम शामिल था।
उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों ने उत्तम सहित 12 केवाईकेएल आतंकियों को हथियारों, के साथ पकड़ लिया था। बाद में गांव की महिलाओं के नेतृत्व में 1200 से 1500 लोग आतंकियों की सुरक्षा के लिए ढाल बन गए। सुरक्षाबलों ने भीड़ से अपील की, लेकिन उसका कोई प्रभाव नहीं निकला। भीड़ पर कार्रवाई करते तो मासूम लोगों को नुकसान होता, इसलिए सेना ने आतंकियों को ग्रामीणों को सौंप दिया और वहां से जब्त हथियार लेकर वापस हो गई।
हिंसा में 100 से अधिक मौतें
मणिपुर में आरक्षण को लेकर कुकी और मैतेई समुदाय के बीच पिछले एक महीने से हिंसक झड़पें जारी है। दोनों ग्रुप के बीच पहली झड़प तीन मई को हुई। इसके बाद से राज्य के इलाकों में हिंसा जारी है। जातीय हिंसा में करीब 100 मौत हो चुकी है। मणिपुर की आबादी में 53 प्रतिशत मैतेई समुदाय से हैं। ये इंफाल घाटी में रहते हैं। जबकि, आदिवासी नागा और कुकी की आबादी 40 फीसद है ये पहाड़ी इलाकों में रहते हैं।
ब्लास्ट की जांच एनआईए को
मणिपुर पुलिस ने बिषणुपुर जिले के क्वकटा गांव में हुए ब्लास्ट की जांच एनआईए को सौंप दी है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने कार में बम रखा था। जो एक पुल पर खड़ी थी। ब्लास्ट के कारण पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। इसमें तीन युवक घायल हुए थे।

