बरेली: देश में आमतौर पर विजयदशमी के पहले रामलीला (Ram-Leela) का आयोजन होता है। लेकिन, क्या आपको मालूम है बरेली के बड़ी बमनपुरी मोहल्ले में फाल्गुन माह में भी रामलीला का मंचन होता है। 162 वर्ष पुरानी इस रामलीला को वर्ष 2015 में यूनेस्को (UNESCO) ने विश्व धरोहर घोषित किया था। रामलीला की खास बात यह है कि रामलीला के अलग-अलग प्रसंगों का मंचन अलग-अलग जगहों पर आयोजित होता है। इस वर्ष 12 मार्च से गणेश पूजन से रामलीला की शुरुआत होगी।
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विश्व धरोहर है रामलीला
इस वर्ष रामलीला का 162वां मंचन होगा। होली (Holi) के अवसर पर होने वाली इस अनोखी रामलीला को यूनेस्को ने वर्ष 2015 में विश्व धरोहर का दर्जा दिया था, जिसके बाद प्रदेश सरकार ने रामलीला को प्रतिवर्ष एक लाख रुपये देने का फैसला लिया था।
राम बारात होती है आकर्षण का केंद्र
बड़ी बमनपुरी मोहल्ले में होने वाली इस रामलीला में होली के एक दिन पहले शहर में राम बारात का आयोजन होता है, जो कि शहर के कई इलाकों से गुजरती है। राम बारात में होरियारों की टोली भी शामिल होती है, जो लोगों पर रंगों की बौछार करते हुए चलती है। रामबा रात का जगह-जगह फूल बरसा कर स्वागत किया जाता है। राम बारात का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है।
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हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है रामलीला
आजादी से पहले इस रामलीला को रोकने का प्रयास अंग्रेजों ने किया था। बताते हैं कि तब धर्मगुरु आला हजरत ने अदालत में पैरवी कर रामलीला को शुरू कराया था, इसलिए ये रामलीला आपसी भाई चारे की मिसाल भी है। राम बारात का मुस्लिमों द्वारा भी जगह-जगह पर स्वागत किया जाता है।

