लखनऊ: पुलिस विभाग में सुविधाएं बढ़ी। अत्याधुनिक असलहे भी आए। आधुनिक साजो-सामान से भी विभाग लैस हुआ। जिसके चलते पुलिस महकमें में काफी कुछ सुधार और बदलाव आया, पर हर थाने पर कम से कम एक चालक की तैनाती धरी की धरी रह गई। जिसके चलते सूबे में पुलिस की गई गाडियां पलटी और दुघर्टना का शिकार हुई हैं।
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वहीं डायल 112 की हालत उससे अधिक खराब है। जहां गाडियां खूब हैं। चारो—तरफ फर्राटे भी भर रही हैं। रिस्पांस टाइम में घटना स्थल पर भी पहुंचती हैं लेकिन इन गाडियों पर तैनात चालक या तो अप्रशिक्षित हैं। या फिर होमगार्ड (Homeguard) विभाग से मिले होमगार्ड गाडियां की कमान संभाल रहे हैं। यह हाल पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ (Lucknow) का ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश का है। जहां आज भी डायल 112 की अधिकतर गाडियों को होमगार्ड ही चलाते हैं। जिन्हें किसी तरह का कोई विभागीय प्रशिक्षण नहीं मिला है और न ही वह गाड़ी चलाने के लिए अधिकृत हैं। बावजूद इसके होमगार्डो के सहारे गाडियां फर्राटा भर रही हैं। जिसे लेकर कई बार विभागीय स्तर पर शासन को प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है लेकिन अभी तक पुलिस महकमें में चालकों की भर्ती नहीं हो सकी है। पुलिस सूत्रों की माने तो हर थाने में एक गाड़ी और एक चालक की जरूरी है। अब तो एक थाने में कम से कम दो गाडियां और डायल 112 की हजारों गाडियां सड़क पर अप्रशिक्षित चालकों के हाथों में हैं। ज्यादातर गाडियां अप्रशिक्षित पुलिसकर्मी या फिर होमगार्ड ही चला रहे हैं। जिसकी वजह से कभी कहीं भी अप्रिय घटना होने पर दूसरी गाड़ी चलाने के लिए चालक नहीं मिलता तो होमगार्ड या फिर सिपाही से गाडी चलवाई जाती है।

