नई दिल्ली – दुष्कर्म के मामले में हाईकोर्ट कोलकाता (High Court Kolkata) ने एक अभूतपूर्व फैसला सुनाया हैं। जिसमें हाईकोर्ट ने कहा कि है कि दुष्कर्म पीडिता या यौन पीड़िता का एक ही सबूत दोष सिद्ध करने के लिए काफी है। उसको अन्य किसी सबूत को देने की जरूरत नहीं है। ऐसे में पीडिता के सबूतों को संदेह के साथ परीक्षण की कोई जरूरत नहीं है। जैसे कि अपराधी की मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट जरूरी होती है। कोलकाला हाईकोर्ट के जस्टिस केसांग डोमा भूटिया और जस्टिस शेखर बी. सराफ की पीठ ने यह फैसला सुनाया है। पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले कई फैसलों में कहा कि गंभीर अपवादों के अलावा दुष्कर्म पीड़िता का सबूत अपराधी को सजा के लिए पर्याप्त माना जाए।
पीठ ने यह भी कहा कि “एक लड़की, जो दुष्कर्म का शिकार हुई है। वह अपराध सहभागी नहीं बल्कि किसी अन्य व्यक्ति की वासना का शिकार हुई है। इसलिए उसके सबूतों को एक संदेह के साथ मेडिकल परीक्षण की जरूरत नहीं है। एक दुष्कर्म पीडित महिला का एकमात्र भरोसेमंद सबूत उसके आरोपी को दोषी ठहराने के लिए काफी है। दुष्कर्म के अपराधी को दोषी साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष का सिर्फ एक ही सबूत काफी है। लेकिन यह जरूरी है कि वह एकमात्र सबूत आत्मविश्वास वाला हो और भरोसेमंद के अलावा बेदाग और उत्कृष्ट गुणवत्ता का होना चाहिए।

