करीब तीन साल से बंद पड़े राय उमानाथ बली ऑडीटोरियम को लेकर कलाकारों में दर्द के साथ गुस्सा भी है
Zeba Hasan
कैसरबाग के दिल में बसा राय उमानाथ बली ऑडिटोरियम (Rai Umanath Auditorium) रंगकर्मियों के लिए मंदिर जैसा है। करीब 35 साल पहले निर्मित हुआ यह ऑडीटोरियम कई नाट्य महोत्सवों का गवाह रहा है। इसकी दोपहरे कलाकारों की आवाजाही से गुलजार रहती थीं तो शामें नाटकों के मंचन से सजा करती थीं। लेकिन पिछले तीन साल से ज्यादा वक्त गुजर चुका है राय उमानाथ बली के दरोदीवार पर सन्नटा पसरा है। मरमत के लिए बंद हुए इस ऑडीटोरियम का काम अभी भी पूरा नहीं किया जा सका है। इसके बंद होने से शहर के तमाम रंगकर्मी बिखर से गए हैं। रंगकर्मियों ने कभी जूता पॉलिश किया तो कभी काली पट्टी बांध कर राय उमानाथ बली ऑडीटोरियम को दोबारा से खोलने की मांग की लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। आज विश्व रंगमंच दिवस के मौके पर भी रंगकर्मियों के इस मंदिर में सन्नाटा ही पसरा है, जिसकी वजह से कलाकारों में दुख के साथ गुस्सा भी है।
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नाटक का मंचन करें भी तो कैसे

वहीं आकांक्षा थिएटर आर्ट्स के फाउंडर प्रभात बोस (Prabhat Kumar Bose) का कहना है कि बली के बंद हो जाने से हम कलाकार बिखर से गए हैं। यह ऑडीटोरियम सिर्फ रंगकर्मियों के लिए ही नहीं परफॉरमिंग आर्ट के हर कलाकार के लिए वरदान था। मैं इससे पिछले 25 साल से जुड़ा हूं और सैकड़ों नाटक इस मंच पर किए हैं। कलाकारों की बैठकी का ठिकाना हुआ करता था यह ऑडीटोरियम। सबसे बड़ी बात यह थी कि कम पैसे में हम नाटक करते थे यहां पर। यहां नाटक करने के लिए तीन हजार देने होते हैं और अगर हम संतगाडगे में शो करते हैं तो तीस हजार देने पड़ते हैं। अब इतना बजट हमारे पास आता नहीं। ऐसे में हम मंचन करें तो कहां करें।
शासन कर रहा है अनदेखी
सीनियर थिएटर आर्टिस्ट डॉ अनिल रस्तोगी (Dr. Anil Rastogi) कहते हैं कि करीब 35 साल पहले बली ऑडीटोरियम बना था। इसके बनने से रंगकर्मियों को एक ऊर्जा मिली थी। कम बजट वाले नाटकों को करना भी यहां सबके बस में था क्योंकि यह सरकारी ऑडीटोरियम है। पिछले तीन साल से हम लोग लगातार इसे खोलने जाने के लिए आवाज उठा रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं है। शासन की अनदेखी का ही नतीजा है कि ऑडीटोरियम का काम तीन साल में पूरा नहीं हो पाया है। कितने अफसोस की बात है कि रंगमंच दिवस के मौके पर हम रंगकर्मियों का यह मंदिर सूना पड़ा है।

धूम से होता था विश्व रंगमंच दिवस
विश्व रंगंमच दिवस (World Theatre Day 2022) पर बली मेखूब धूम होती थी, गोष्ठी से लेकर भोज का आयोजन तक किया जाता था। नाटक, नृत्य सब मिलकर इस दिवस को बली के मंच पर सेलीब्रेट करते थे, लेकिन पिछले कुछ साल से ऐसा नहीं हो पा रहा है। यह कहना है आकांक्षा थिएटर आर्ट्स रंगमंडल के नाट्य गुरु अशोक लाल का। कला और कलाकारों की कई यादें इस प्रेक्षागृह से जुड़ी हुई हैं। लेकिन हमारी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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काली पट्टी बांध किया विरोध
रंगकर्मी मुकेश वर्मा कहते हैं कि बली की मरम्मत को लेकर हमने जूता पॉलिश अभियान किया था। इसके अलावा अन्ना मेरा बाप नाटक करके भी कटाक्ष किया था लेकिन मरम्मत के नाम पर बली बंद तो किया गया लेकिन काम पूरा ही नहीं किया जा रहा है। इसके लिए बजट भी पास चुका है लेकिन बस काम है कि खत्म ही नहीं हो रहा है। कई रंगकर्मी ऐसे हैं जो नाटक करना चाहते हैं लेकिन मंच न मिल पाने की वजह से नाटक कर नहीं पा रहे हैं। विश्व रंगमंच दिवस (World Theatre Day 2022) के मौके पर शहर में कई कार्यक्रम हो रहे हैं लेकिन यह बली जहां रंगमंच की कई कहानियां परवान चढ़ी हैं वह कलाकारों का मंदिर सूना ही रहेगा।

