किसानों ने फिर से लिया प्रण, अब MSP के मुद्दे पर देश भर में शुरू करेंगे ये अभियान

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लखनऊ। 11 से 17 अप्रैल तक देशभर के किसान संगठन “संयुक्त किसान मोर्चा” के बैनर तले एमएसपी गारंटी सप्ताह मनाएंगे। इस कार्यक्रम के तहत अलग-अलग जगहों पर धरना, प्रदर्शन और गोष्ठी के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को किसान का कानूनी अधिकार बनाने की मांग पर जागृति अभियान चलाया  जाएगा। इस कार्यक्रम की घोषणा संयुक्त किसान मोर्चा की दिल्ली में 14 मार्च की बैठक में की गई थी। गौरतलब है कि नवंबर 2020 में दिल्ली में मोर्चे की शुरुआत के पहले से ही संयुक्त किसान मोर्चा ने न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग उठाई थी। 

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मांग के अनुसार एमएसपी केवल 23 फसलों के लिए नहीं, बल्कि फल, सब्जी, वनोपज और दूध, अंडा जैसे समस्त कृषि उत्पाद के लिए तय की जाए। किसानों की मांग है कि एमएसपी तय करते समय आंशिक लागत की जगह संपूर्ण लागत  के डेढ़ गुणा को न्यूनतम स्तर रखा जाए। साथ एमएसपी की सिर्फ घोषणा न हो, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाए कि हर किसान को अपने पूरे उत्पाद का कम से कम एमएसपी के बराबर भाव मिले। एमएसपी की कानूनी गारंटी के तहत किसानों की मांग है कि एमएसपी सरकार के आश्वासन और योजनाओं पर निर्भर न रहें, बल्कि इसे मनरेगा और न्यूनतम मजदूरी की तरह कानूनी गारंटी की शक्ल दी जाए। ताकि एमएसपी न मिलने पर किसान कोर्ट कचहरी में जाकर मुआवजा वसूल कर सकें।

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संयुक्त किसान मोर्चा ने इस भ्रांति का भी खंडन किया है कि इस सीजन में किसान को सभी फसलों पर एमएसपी से ऊपर दाम मिल रहे हैं। यूक्रेन युद्ध की वजह से गेहूं के दाम बढ़े। फिर भी अप्रैल के प्रथम सप्ताह में देश की अधिकांश मंडियों में गेहूं का दाम सरकारी एमएसपी 2,015 से अधिक नहीं था। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की कई मंडियों में गेहूं 1500 से नीचे तक बिक रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से देशभर के किसानों और किसान संगठनों की ओर से अपील की गई है कि 11 से 17 अप्रैल के बीच अपने अपने जिले में कम से कम एक कार्यक्रम का आयोजन अवश्य करें ताकि एमएसपी के सवाल पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की तैयारी शुरू की जा सके। मोर्चे ने यह विश्वास व्यक्त किया है की जैसे तीन काले कानूनों के खिलाफ लड़ाई जीती गई थी, उसी तरह हम एमएसपी की कानूनी गारंटी का संघर्ष भी जीतेंगे।

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