Uttarakhand में Congress ने दिखाया युवा नेतृत्व पर भरोसा लेकिन चुनौती कम नही

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देहरादून। उत्तराखंड में काँग्रेस की कमान इस बार युवा हाथों में सौंप दी गई है। करन महारा की नए प्रदेश अध्यक्ष की तैनाती ने यह बता दिया है कि इस बार काँग्रेस नए दौर की शरुवात करने जा रही है। नए दौर की इस शुरुवात में मुश्किलें कम नही है। करन माहरा की ताजपोशी के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी की आवाज भी बुलंद होती दिख रही है। करन माहरा के अध्यक्ष बनने पर हरीश रावत सबसे बड़ा नाम है जो कंही न कंही उनकी इस तैनाती से खुश नही दिख रहे है।

उत्तराखंड की राजनीति की अच्छी समझ रखने वाले करन एक अच्छे वक्ता के रूप में भी जाने जाते है। उनका बोलने के अन्दाज के पिछली विधान सभा मे सभी कायल रहे थे। हालांकि करन इस बार विधान सभा चुनाव हार गए थे।उसके बाद भी उन पर उत्तराखंड काँग्रेस की जिम्मेदारी देना कांग्रेस में नई शुरुवात के संकेत दे रहा है। हालांकि इस बात के कयास पहले से ही लगाए जा रहे थे कि कुमाऊँ से नया पीसीसी चीफ होगा। इधर दूसरी ओर यशपाल आर्य की नेता प्रतिपक्ष की ताजपोशी ने प्रीतम सिंह समर्थकों में गुस्सा ला दिया है।

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प्रीतम सिंह की सीएम धामी के साथ हुई मुलाकात ने इस गुस्से की चिंगारी में घी डालने का काम किया है। उनके समर्थक सोशल मीडिया पर खुले आम इस पद को लेकर पैसे के लेनदेन का आरोप लगा रहे है। दरअसल प्रीतम सिंह नेता प्रतिपक्ष की रेस में थे और उनका नेता प्रतिपक्ष बनना लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन यशपाल की नियुक्ति ने पूरा सीन ही बदल दिया।

हालांकि माना यह भी जा रहा है कि यशपाल के काँग्रेस में उनके पुराने संबंध भी उनकी इस जिम्मेदारी में सहायक रहे है। यशपाल भाजपा सरकार में मंत्री रहने से पहले काँग्रेस में बतौर प्रदेश अध्यक्ष और विधान सभा स्पीकर रह चुके है। सवाल यह भी खड़े हो रहे है कि काँग्रेस ने तीनों पद कुमाऊँ रीजन के हिस्से में डाल दिये है जिससे गढ़वाल को दरकिनार से कर दिया गया है जो उनकी नाराजगी का सबब भी है। अभी तक भाजपा-काँग्रेस गढ़वाल कुमाऊँ में सामंजस्य बनाये रखने के लिए बराबरी की भागीदारी देती आई है।

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