Bank Fraud In India: बैंकों के फ्रॉड पर खामोशी क्यों,एक साल में 83 हजार से अधिक बैंकिंग फ्रॉड

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नई दिल्ली। बैंकों से फ्रॉड पर इन दिनों खामोशी छाई हुई है। कांग्रेस के कार्यकाल में हुए बैंकिंग घोटालों को तो केंंद्रीय जांच एजेंसियां उधेड़ रही हैं। लेकिन भाजपा शासन काल में हो रहे बैंकिंग फ्रॉड पर जहां सरकार चुप है वहीं देश की ये जांच एजेंसियां भी कुछ नहीं बोल रही है। दो ग्राम गांजे की पुड़िया के पीछे तीन महीने तक शोर मचाने वाले भाजपाई और अन्य नेता भी चुप हैं। बता दें कि बैंकों से फ्रॉड करने वाली इन कंपनियों ने देश के एक बड़े राजनैतिक दल को फंड दिया था।

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वर्ष 2020-21 में ही देश में अब तक 83 हजार से अधिक बैंकिंग फ्रॉड हो चुके हैं। जिसके तहत 1.38 लाख करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। पिछले आठ साल में देश में छह से सात लाख करोड़ का बैंक फ्रॉड अब तक हो चुका है। इस फ्रॉड में कई बैंक डूब गए या कंगाल हो गए। इनमें से कई का आपस में विलय कर दिया गया। इसके पीछे भी कारण बड़ी कंपनियों द्वारा बैंक फ्रॉड करना है। बैंकों के विलय और बैंक बंद होने के बाद भी बैंकों की लूट जारी है। हाल ही में गुजराती की एक कंपनी एबीजी शिपयार्ड ने 23 हजार करोड़ रुपये का बैंक फ्रॉड किया। अब जो नया मामला सामने आया है। वो इससे भी बड़ा है। यह नया मामला 34,615 करोड़ रुपये के घोटाले का है।

इस लूट को अंजाम देने वाली कंपनी बधावन ब्रदर्स की है जो गुजरात में भाजपा को चंदा देते रहे हैं। बताया जाता है कि बधावन ब्रदर्स ने भाजपा के पार्टी फंड में 28 करोड़ रुपये का चंदा दिया था। इतिहास का सबसे बड़े इस बैंक फ्रॉड करने वालों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर भी करोड़ों रुपये का फ्रॉड कर डाला। यह घोटाला योजना के आडिट में भी सामने नहीं आया। प्राइवेट यस बैंक के आडिट में यह सामने आया तो बैंक के होश उड़ गए।  

देश में यह सब किसकी शह पर हो रहा है। इसको रोका क्यों नहीं जा रहा है? विपक्ष के निशाने पर अब इन सब घोटालों को लेककर मोदी सरकार निशाने पर है। जो कंपनी देश के बैंकों को हजारों करोड़ का चूना लगाकर कंगाल घोषित हो रही है। कांग्रेसी नेता और सांसद जयराम रमेश का कहना है कि ये वहीं कंपनी   है जो भाजपा को चंदा दे रही है। जब बैंक में किए गए घोटाले को भाजपा चंदा के रूप में स्वीकार कर रही है। इसकी भी जांच होनी जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसी कारण से इन घोटालों पर लगाम नहीं लग रही है। उनका सवाल है कि क्या मोदी सरकार को इस लूट की जानकारी नहीं?

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जयराम रमेश का कहना है कि वाधवन ब्रदर्स की जो कंपनियां बैंकों के साथ फ्रॉड कर रही थीं। उनसे भाजपा लगातार चंदा ले रही थी। इस कारण कंपनी की लूट पकड़ में नहीं आई। बैंकों में 34,615 करोड़ रुपये का फ्रांड करने वाली कंपनियों से भाजपा ने चंदा क्यों लिया? उनका सवाल है कि क्या 2015 से हो रही बैंकों में ये लूट इसीलिए नहीं रोकी गई कि भाजपा को इसको वरदहस्त था?

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