नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच मामले में रोक लगाने के संकेत दिए हैं। अपने फैसले में देश की सुप्रीम अदालत ने कहा है कि हेट स्पीच से देश का माहौल बिगड़ रहा है। इस पर रोक लगाना जरूरी है। सीजेआइ यूयू ललित और जस्टिस एस.रविंद्र भट की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है। याचिका में आरोप लगाया है कि सरकारी प्राधिकारियों ने हेट स्पीच रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।याचिकाकर्ता हरप्रीत मनसुखानी ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगले आम चुनावों से पहले भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए हेट स्पीच जारी है। हेट स्पीच दलों के फायदे का कारोबार बन गया है। मेरे पास सबूत हैं कि एक पार्टी ने किस तरह ‘कश्मीर फाइल्स’ की फंडिंग की और फिल्म को टैक्स फ्री करा गया। खंडपीठ ने कहा कि हेट स्पीच के मामलों में आपराधिक धाराओं में कार्रवाई की जानी चाहिए। हमें देखना होगा कि हेट स्पीच में कौन से लोग लिप्त हैं। सीजेआइ ने कहा कि कोर्ट इसका तभी संज्ञान ले सकता है जबकि ऐसे मामलों में ठोस सबूत मिले। अब इस मामले में अगली सुनवाई एक नवंबर को होगी।
जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की खंडपीठ ने हेट स्पीच संबंधी एक याचिका पर उत्तराखंड और दिल्ली सरकार से भी जवाब मांगा है। उत्तराखंड में धर्म संसद और दिल्ली में हिंदू युवा वाहिनी के कार्यक्रम में हेट स्पीच मामले में कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार और दिल्ली सरकार को तथ्यात्मक स्टेटस तथा उनकी ओर से की गई कार्रवाई के बारे में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी। सुप्रीम कोर्ट ने धर्म संसद नेता यति नरसिंहानंद के संविधान और अदालत के खिलाफ आपत्तिजनक इंटरव्यू की ट्रांसक्रिप्ट भी मांगी है। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने नरसिंहानंद के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने की मंजूरी पहले ही दे दी हैं।

