पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का क़द घटाने का एक प्रस्ताव आज ममता कैबिनेट ने पास कर दिया है. प्रस्ताव के मुताबिक प्रदेश की सभी गवर्नमेंट यूनिवर्सिटीज के चांसलर प्रदेश के राज्यपाल न होकर राज्य के मुख्यमंत्री होंगे जो फिलहाल ममता बनर्जी हैं. वहीँ कैबिनेट ने उस प्रस्ताव को भी मंज़ूरी दे दी है जिसमें प्राइवेट यूनिवर्सिटीज के विजिटर पद से राज्यपाल को हटाकर उनके स्थान पर राज्य के शिक्षा मंत्री को नियुक्त किया जा सकता है.
गौरतलब है कि 26 मई को राज्य मंत्रिमंडल ने गवर्नर जगदीप धनखड़ को हटाने और उनके स्थान पर ममता बनर्जी को चांसलर बनाने का प्रस्ताव पारित किया था. दरअसल विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर ममता सरकार और राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच काफी आरसे से टकराव बना हुआ था, धनकड़ का आरोप था कि उन्ही सहमति लिए बिना प्रदेश सरकार ने कई कुलपतियों की नियुक्ति का दी वहीँ सरकार का कहना है राज्यपाल कुलपतियों की नियुक्ति की फाइल दबाकर बैठ जाते हैं जिससे विश्वविद्यालों में बिना कुलपति शैक्षिक सत्र बाधित होता है और पढ़ाई पिछड़ने से नैजवानों का अमूल्य समय बर्बाद होता है.
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राज्यपाल जगदीप धनकड़ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी में हमेशा से 36 का आंकड़ा रहा है, ममता जहाँ राज्यपाल को केंद्र सरकार का एजेंट बताती रही हैं वहीँ राज्यपाल धनकड़ ममता बनर्जी पर संविधान की परवाह न करने का आरोप लगाते रहे हैं और ममता सरकार को घेरने का कभी कोई मौका नहीं छोड़ते। कभी कभी तो ऐसा लगता है कि वह यह भी भूल जाते हैं कि वह संवैधानिक पद पर बैठे हैं. अब इस मामले में ममता को मौका मिला है कि राज्यपाल का क़द कम किया जाय. अभी देखना है विधानसभा में बिल पेश होने के बाद क्या होता है, वैसे ममता के पास अगर बहुमत है तो धनकड़ के पास केंद्र का समर्थन। इतनी आसानी से तो वह ममता की मर्ज़ी नहीं चलने देंगे।

