NRC की तरफ सरकार ने फिर बढ़ाया कदम

नेशनलNRC की तरफ सरकार ने फिर बढ़ाया कदम

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केंद्र की मोदी सरकार ने एक कैबिनेट नोट और एक बिल के माध्यम से एकबार फिर विवादस्पद नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन की शुरुआत की है. इस कैबिनेट नोट और बिल के अनुसार सरकार का इरादा देश के सभी नागरिकों का एक राष्ट्रिय डाटा बेस तैयार करना है जिसमें सभी नागरिकों का जन्म और मृत्यु की जानकारी दर्ज की जाएगी. बता दें कि अभी इस डाटाबेस का रखरखाव राज्यों के रजिस्ट्रारों द्वारा किया जाता है. सरकार कि इस नई पहल को तीन साल पहले शुरू किये गए NRC अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है, तब NRC को लेकर असम में बहुत बवाल हुआ था.

इस बिल के अनुसार अब भारत के रजिस्ट्रार जनरल इस डेटाबेस को बनाए रखने के लिए राज्यों में मुख्य रजिस्ट्रार के साथ मिलकर काम करेंगे. यह डाटाबेस आधार कार्ड, राशन कार्ड,वोटर लिस्ट, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस की इंचार्ज एजेंसियों के साथ updation का काम करेगा. हालांकि इससे पहले आधार कार्ड को वोटर कार्ड से जोड़ने का प्रस्ताव स्वैच्छिक था. संसद में आधार को वोटर लिस से जोड़ने के प्रस्ताव का काफी विरोध हुआ था मगर अब सरकार नए सिरे और नए तरीके इस पर चलने की योजना बना रही है. बता दें कि एनआरसी पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तीन साल पहले जो घोषणा की थी यह नोट उसी के आधार पर है.

गौरतलब है कि तीन साल पहले नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA ) के साथ असम राज्य के लिए पहली बार घोषित की गई नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन बनाने की योजना का पूरे देश में ज़बरदस्त विरोध हुआ था. असम में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी, दिल्ली के शाहीनबाग़ में महिलाओं का बड़े लम्बे समय तक आंदोलन चला था जो कोरोना आने के बाद ही ख़त्म हुआ था. अब मोदी सरकार के इस कदम को लोग एकबार फिर CAA के साथ जोड़कर देख रहे हैं.

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