योगी सरकार के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में आज से वक्फ़ बोर्ड की संपत्तियों का सर्वे शुरू हो चुका है. बता दें कि इस सर्वे में जो सम्पत्तियाँ वर्ष 1989 के बाद वक्फ़ बोर्ड में दर्ज की गयी हैं वह सभी तरह की सार्वजनिक संपत्तियां वापस राजस्व विभाग के नाम दर्ज की जाएंगी. इस सर्वे में ऊसर, बंजर और भीटा जैसी जमीनों के रेकार्डों की जांच की जाएगी जो पहले राजस्व रिकॉर्ड में थीं लेकिन अब वो वक्फ़ बोर्ड में दर्ज कराई जा चुकी हैं. यह सर्वे अक्तूबर में ही पूरा किया जायेगा और सर्वे की रिपोर्ट तहसील और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी सरकार को भेजेंगे.
दरअसल 1989 में शासन द्वारा जारी एक आदेश के आधार पर ऊसर और बंजर जैसी संपत्तियों को वक्फ़ में दर्ज करा लिया गया था. वक्फ में इन सम्पत्तियों को दर्ज कराने के बाद इन संपत्तियों को गलत तरीके से बेचा जा रहा था. सरकार के मुताबिक वक्फ सम्पत्तियों के खरीद फरोख्त में माफिया शामिल थे और एक बहुत बड़ा कारोबार चला रहे थे जिससे सरकार को हज़ारों करोड़ के राजस्व का नुक्सान हो रहा था. वक्फ सम्पत्तियों को भू माफ़ियानों से बचाने के लिए योगी सरकार ने वक्फ सम्पत्तियों के सर्वे का निर्णय लिया ताकि पता लगाया जा सके कि इस खेल में कितनी गहराई तक लोग शामिल हैं.
बता दें कि वक्फ सम्पत्तियों के दुरूपयोग का मामला हमेशा उठता रहा है. हज़ारों ऐसी वक्फ सम्पातियाँ जिनपर लोग कब्ज़ा किये बैठे हैं और इन सारे अवैध कब्ज़ों के लिए कहीं न कहीं मुतवल्ली शामिल हैं जो किराएदारी और प्रॉपर्टी बेचने के खेल में शामिल हैं. वक्फ सम्पत्तियों के दुरूपयोग के ज़्यादातर मामले शिया समुदाय में मिलते हैं, मौलाना कल्बे जवाद कई बार इसके खिलाफ मुहीम छेड़ चुके हैं, आंदोलन कर चुके हैं. उम्मीद है कि योगी सरकार के इस कदम से वक्फ सम्पत्तियाँ हड़प करने वालों पर लगाम ज़रूर लगेगी.

