पुरानी पेंशन योजना एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन रहा है और साथ ही चुनाव जितावी मुद्दा भी. हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सत्ता में वापसी करवाने में इस मुद्दे ने बड़ी भूमिका निभाई है. अब अपने वादे के मुताबिक कांग्रेस सरकार ने राज्य में पुरानी पेंशन योजना की बहाली कर दी है. हालाँकि पुरानी पेंशन योजना को कुछ अर्थशास्त्री राज्यों के लिए बहुत घातक भी बता रहे है, उनका मानना है कि इससे राज्य कंगाल हो सकते हैं.
पहली कैबिनेट में लगी मुहर
जानकारी के मुताबिक हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पहली कैबिनेट की मीटिंग में OPS पर मुहर लगवाकर बहाली कर दी है, इससे पहले वित्त विभाग के अधिकारियों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई थी लेकिन बाद में इस मुद्दे को सुलझा लिया गया है। मुखयमंत्री ने बताया कि NPS के तहत आने वाले सभी कर्मचारियों को OPS में शामिल किया जायेगा। OPS की बहाली से पहले कर्मचारियों से भी परामर्श किया गया था.
OPS था प्रमुख चुनावी मुद्दा
बता दें कि गुरूवार को मुक्यमंत्री ने कर्मचरियों से भी सम्बोधन किया था और कहा था कि OPS बहाली सिर्फ राजनीतिक वादा पूरा करने के लिए नहीं है बल्कि यह उन कर्मचारियों के स्वाभिमान की रक्षा करने के लिए भी है जिन्होंने हिमाचल के विकास की कहानी लिखी है. बता दें कि हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना की बहाली को कांग्रेस पार्टी ने एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया था और सरकार बनते ही उसे लागू करने का वादा किया था. 1 अप्रैल 2004 को देशभर में OPS को बंद कर दिया गया था। एनपीएस के तहत कर्मचारी अपने मूल वेतन का 10 प्रतिशत अपनी पेंशन के लिए योगदान देते हैं वहीँ राज्य सरकारों का योगदान 14 प्रतिशत का होता है.

