Chandrayaan-3 Mission: चंद्रयान 3 के चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर उतरने की प्रक्रिया का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। अब से एक घंटे बाद चंद्रयान 3 को चंद्रमा की धरती पर उतारने के लिए इसरो काम करना शुरु कर देगा। भारत का अंतरिक्ष का सफर, वो भी अपने दम पर, कई विकसित देशों को बहुत अखर रहा है। भले तकनीक के रूप में इन देशों से अपेक्षित सहयोग न मिल रहा हो, लेकिन अब वो अपने चंद्रयान-3 पर नजर रखे हुए हैं।
‘चंद्रयान 3’ की सफल लांचिंग के बाद से दुनिया के सभी देश ‘इसरो’ के अंतरिक्ष मिशन पर नजर बनाए हैं। इन देशों में ‘महाशक्ति’ अमेरिका भी शामिल है। अमेरिकी ‘नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन’ यानी नासा भी चंद्रयान-3 के हर गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं। चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग पर आस्ट्रेलिया और स्पेन में बने सेंटर से नजर रख रहा है। ब्रूनेई और इंडोनेशिया के स्पेस सेंटर भारत के चंद्रयान मिशन पर नजर लगाए हैं।
इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. किरण कुमार ने कहा कि कई देशों ने अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए अलग-अलग जगहों पर स्पेस सेंटर स्थापित किए हैं। जैसे भारत का स्पेस नेटवर्क सेंटर बंगलूरू में है। वैसे ही विकसित देशों में ऐसे नेटवर्क सेंटर बनाए हुए हैं। अमेरिका, आस्ट्रेलिया और स्पेन में बने सेंटरों से चंद्रयान लैंडिंग पर नजर रख रहा है।
डॉ. किरण कुमार ने कहा कि भारत के अंतरिक्ष का सफर, वो भी अपने दम पर, विकसित देशों को बहुत अखर रहा है। भले तकनीक के रूप में इन देशों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। लेकिन अब वे चंद्रयान-3 पर नजर रख रहे हैं। अमेरिका स्थित ‘नासा’ भी ‘चंद्रयान-3’ को ट्रैक कर रहा है।
ट्रैकिंग से क्लेम वेरिफाई होगा
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसके ढाका के मुताबिक, इसमें कुछ गलत नहीं है। नासा सहित कई देशों में अंतरिक्ष मिशन तैयारी में जुटे संगठनों के साथ कुछ संधियां और समझौते हैं। इसके तहत वो देश, दूसरे राष्ट्र के अंतरिक्ष मिशन पर नजर रखते हैं। उसके बाद लैंडिंग को वे देश ट्रैक करते हैं। इस तरह की ट्रैकिंग से हमारा क्लेम वेरिफाई होता है। नासा सहित दूसरे स्पेस संगठन, आपस में डेटा साझा करते रहते हैं। दुनिया में ब्रूनेई और इंडोनेशिया के पास इस तरह की तकनीक है। वे भी नजर रखते हैं। हमें चंद्रयान 3 की सॉफ्ट एवं सेफ लैंडिंग की उम्मीद है।
चंद्रमा पर अपना सर्विस स्टेशन होगा
वरिष्ठ वैज्ञानिक नरेंद्र भंडारी ने कहा कि इस बार मजबूत लैंडर बनाया है। रोबोट वही है। जो चंद्रयान के दौरान उपयोग किया गया था। चंद्रयान-1 से पता चला था कि चंद्रमा के कई भागों में बर्फ है। पानी है या गीलेपन है। उम्मीद है कि टेस्टिड इंजन के माध्यम से इस बार चंद्रयान-3 सुरक्षित एवं सॉफ्ट लैंडिंग कर पाएगा। चंद्रयान-3 की कामयाबी भविष्य के द्वार खोलेगी। इसकी सफलता के बाद भारत, चंद्रमा पर सर्विस स्टेशन बना सकेगा। लाइट के पोलेराइलेशन को स्टडी किया जाएगा। स्टेशन का उपयोग, आगे की रिसर्च के लिए किया जाएगा। उस समय दुनिया में भारत की अपनी धमक होगी। दुनिया, भारत की तरफ देखेगी। संभव है कि अब का खर्च एक पैसा आगे चलकर हमारे देश को एक अरब रुपए देगा।

