यादव कुनबे को फिर से हराभरा करेंगे नारद राय और अंबिका चौधरी

उत्तराखंडयादव कुनबे को फिर से हराभरा करेंगे नारद राय और अंबिका चौधरी

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यादव कुनबे को फिर से हराभरा करेंगे नारद राय और अंबिका चौधरी

लखनऊ । पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी की सपा में वापसी की तस्वीर अब साफ है। काम-डाऊन जारी है और इसकी मात्र घोषणा का इंतजार है। अंबिका के साथ बीजेपी के भी एक दिग्गज नेता अखिलेश यादव की साइकिल पर सवार हो सकते हैं। वैसे भी सपा की नजर भाजपा में खुद को उपेक्षित समझने वाले ब्राह्मण नेताओं पर है। असल में समाजवादी पार्टी खासकर ऐसे नेताओं की टोह ले रही है जिनकी छवि कट्टरवादी नहीं बल्कि उदारवादी हो। बहरहाल, अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी सर्व-समाज को जोडऩे की मंशा रखती है। कुल मिलाकर सीन सपा में पुराने दिगगजों की घर वापसी की है। प्रसपा प्रमुख शिवपाल यादव भी कई दफा सपा से गठबंधन करने के संकेत दिए हैं।

फिलहाल बात जहां तक पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी की सपा में वापसी की है तो उनका बेटा पहले ही सपा खेमे में आ चुका है, यानि पिता की घर वापसी अब औपचारिकता मात्र होगी। वहीं दूसरी ओर छोटे लोहिया के नाम से प्रसिद्ध दिवंगत जनेश्वर मिश्रा के खास रहे नारद राय भी समाजवादी पार्टी में आस्था जता चुके हैं। दिलचस्प यह भी कि दोनों नेता सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ही नहीं शिवपाल यादव के भी खास माने जाते हैं। ऐसे में अगले साल होने जा रहे यूपी विधानसभा चुनाव के करीब आते-आते चाचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश में मिलाप हो जाये तो आश्चर्य न होगा। इसी के मद्देनजर यह भी आंकलन है कि, चुनाव के पहले गाजीपुर से प्रसपा की शादाब फातिमा, बसपा के विजय मिश्रा के साथ भदोही वाले निर्दलीय बाहुबली विधायक विजय मिश्रा भी सपा का रूख कर सकते हैं। …बस हालात और मन बदलने का इंतजार है।

कानून-व्यवस्था को लेकर बीजेपी को पटखनी देने की फिराक में कांग्रेस

गौर हो कि, बलिया के फेफना सीट से अंबिका चौधरी चार बार एमएलए रहे हैं। अंबिका मुलायम और अखिलेश, दोनों की सरकारों में मंत्री रहे, लेकिन 2017 में यादव परिवार में मचे घमासान के दौरान खेमेबाजी में फंसकर अंबिका चौधरी ने पार्टी छोड़ी थी, लेकिन मौजूदा वक्त में अंबिका चौधरी के बेटे आनंद चौधरी के जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीतने के बाद अब यह साफ है कि अंबिका की एक बार फिर घर वापसी हो गई है।

यूपी इलेक्शन में अपनी ‘पुरानी गणित’ से जीत का हल निकालेगी बीजेपी

इस बीच समाजवादी पार्टी ने 2022 विधानसभा चुनाव के लिए बैकवर्ड कार्ड भी खेलने को तैयार है। इस कवायद के तहत सपा निषाद समाज को साधने की फिराक में है। बीते दिनों फूलन देवी के जन्मदिन के बहाने निषाद वोटरों का दिल जीतने को पार्टी प्रयासरत रही। सपा ने भव्य तरीके से फूलन देवी का जन्मदिन मनाया जिसमें पार्टी के पिछड़ा वर्ग के प्रदेश अध्यक्ष और एमएलसी राजपाल कश्यप शामिल थे। असल में इस बार अखिलेश ने राजपाल कश्यप को निषाद समाज के साथ-साथ पिछड़ों को साधने और एक करने की बागडोर सौंपी है।

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