लखनऊ। मुख्तार अंसारी वो बड़ा नाम जो पूर्वांचल के अपराध दुनिया का राबिन हुड बना और जिसे अपनी इमेज मेकओवर का बड़ा क्रेज था। 1990 के दशक में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड हो या फिर 2002 में सड़क पर खुलकर हुई गैंगवार। एके-47 से पूर्वांचल में अब तक सबसे बड़ा हत्याकांड विधायक कृष्णानंद राय को माना जाता है। इस हत्याकांड में 500 राउंड से अधिक गोलियां चली थी। जिसमें भाजपा विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की मौत हुई थी। पोस्ट्मॉर्टम में भी इन सात लोगोंं के शरीर से 110 गोलियां बरामद हुई थी।
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सोचिए कितना विभीत्स हत्याकांड रहा होगा। इस हत्याकांड में नाम आया उस दौर के उभरते पूर्वाचल के मुख्तार अंसारी का। वहीं मुख्तार अंसारी जो आज जेल में है और अपनी हत्या की आशंका जता रहा है। जो कभी राबिन हुड की छपि बनाने की कोशिश करता था या उसके लोगों के बीच बनी थी आज वो जेल में अपनी जान बचाने के लिए जददोजहद कर रहा है। जेल की बैरक में रात में थोड़ी सी आहट होते ही उठकर बैठ जाता है और फिर पूरी रात जागकर काटता है। बताते हैं कि कैसे वो पूर्वाचल के बड़े डान की फेहरिस्त में शामिल हुआ।
कॉलेज की दोस्ती से गैंग में दाख़िला
मुख़्तार अंसारी का ग्राफ़ पूर्वांचल में अदावत से चढ़ा। कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके मुख़्तार अहमद अंसारी के बेटे सुभानुल्लाह अंसारी के घर में मुख्तार का जन्म 1963 में हुआ। सुभानुल्लाह कम्युनिस्ट नेता थे। मुख़्तार अंसारी ने जब कॉलेज की पढ़ाई शुरू की उसी दौरान तय हो गया था कि वो वर्चस्व की लड़ाई लड़ेंगे। ये वहीं समय था जब केंद्र सरकार पूर्वांचल के विकास पर ध्यान दे रही थी। विकास योजनाओं को पूरा करने के लिए रेलवे और अन्य चीजों के ठेके दिए जा रहे थे।
वहीं दूसरी ओर प्रदेश में शराब के ठेके में काफी कमाई थी। उस दौर में ये ठेके उसी के पास होते थे जिसके पास ताकत होती थी। इसी को लेकर मुख्तार ने अपना कद बढ़ाना शुरू किया और मुन्ना बजरंगी जैसे शार्प शूटरों की मदद से एक के बाद एक कत्लोगारद को अंजाम दिया। इसके बाद मुख़्तार ने राजनीति में प्रवेश किया और 1996 में उसके नाम के आगे विधायक लग गया। विधायक बनने के बाद मुख़्तार के तो शक्तियों का अकूत ख़ज़ाना आ गया। बस यहीं से शुरू हुआ मुख्तार का रॉबिन हुड अवतार।
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रॉबिन हुड अवतार और मेक ओवर की कोशिश :
इधर मुख़्तार का मेकओवर समय शुरू हो चुका था। रॉबिन हुड की छवि बनाने में मुख्तार ने कोई कसर नहीं छोड़ी। सरकारी काम अटकता या फिर किसी को घर में शादी के लिए आर्थिक मदद। नौकरी का लफड़ा हो तो ऐसे लोगों के लिए मुख़्तार के दरवाज़े हमेशा खुले रहते थे। मुख़्तार अंसारी की ओर से मदद मिलती और काम भी होते थे। 1990 एक ऐसा समय था। जब पूर्वांचल मुस्लिम बुनकरों के हाथ के बनाए कपड़े लाखों में बिकते थे।
लेकिन ये ख़ुद मोमबत्ती-लालटेन की रोशनी हाथ वाले पंखों के सहारे थे। कहते हैं कि मुख़्तार ने इस दिशा में भी काम करना शुरू किया। जिसका नतीजा हुआ इनके घर रोशनी से जगमग हो गए। इससे मुख़्तार की तूती बोलने लगी थी। मुख़्तार ने अपने लिए राजनीतिक ज़मीन तैयार कर ली थी। ध्रुवीकरण की राजनीति का उनसे लाभ पाने वालों में बड़ा हिस्सा मुस्लिमों का था। मुख़्तार अंसारी मुस्लिमों के नेता कहे जाने लगे। कहा जाता है कि इसी तबके के वोटबैंक पर वो हर बार चुनाव जीतते हैं।

