illustration by Hasan Zaidi
अमित बिश्नोई
इंडिया अगेंस्ट करप्शन, अरे वही अन्ना आंदोलन! आपको याद होगा न. इसी आंदोलन से तो 26 नवम्बर 2012 को आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ था, इसी आंदोलन से तो भारतीय राजनीती के मिस्टर क्लीन अरविन्द केजरीवाल का जन्म हुआ था. महाराष्ट्र के गाँव रानेगनेसिद्धि वाले, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले दुनिया के महायोद्धा श्रीमान अन्ना हज़ारे के आशीर्वाद से. बकौल इंडिया अगेंस्ट करप्शन की टीम दुनिया की महा करप्ट कांग्रेस पार्टी को उखाड़ फेंकने के लिए राजनीतिक पार्टी बनाना मजबूरी है, एक ऐसे राजनीतिक दल को जन्म दिया जिसे करप्शन से नफरत थी, जिसका मुखिया दुनिया का सबसे ईमानदार व्यक्ति था जो राजनीति से भ्रष्टाचार को जड़ से ख़त्म कर देना चाहता था, मगर ये कैसी विडम्बना है कि आज वही व्यक्ति करप्शन के ही आरोप में ED की गिरफ्त में है और शायद जल्द ही वो जेल की सलाखों के पीछे अपने साथियों के साथ नज़र आएगा जो भ्रष्टाचार के मामलों में ही पहले से ही अपने ईमानदार नेता का स्वागत करने के लिए तैयार हैं. आप कल्पना कीजिये कि दुनिया का सबसे तथाकथित ईमानदार राजनेता अपनी ही पार्टी के चुनावी निशान झाड़ू से जेल की बैरेक की सफाई करता हुआ नज़र आ रहा है।
अभी आम आदमी पार्टी को वजूद में आये कितने साल ही हुए हैं, मात्र 13 वर्ष और इन 13 वर्षों में ही उसकी पूरी टॉप लीडरशिप कानून के शिकंजे में है. उसका संस्थापक जेल की चहारदीवारी के पीछे कभी भी जा सकता है. ये वहीँ लोग हैं जो कांग्रेस पार्टी को भ्रष्टाचार के लिए कोसते थे, इन लोगों ने कांग्रेस पार्टी पर भ्रष्टाचार के कौन कौन कौन से आरोप नहीं लगाए थे, वो आरोप जो अदालत में साबित नहीं हो सके, तमाम कोशिश करने के बावजूद भी. उस समय के CAG महोदय विनोद राय साहब के 2जी और कोयला घोटालों की मनगढंत रिपोर्टों का सहारा लेकर जंतर मंतर पर देश की जनता को अन्ना और केजरीवाल की ब्रिगेड ने किस तरह बरगलाया और अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा किया, देश आज अच्छी तरह से जानता है। इतनी अल्पायु में इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन के कर्ताधर्ता खुद सलाखों के पीछे पहुँच गए। इसे क्या कहेंगे, कर्मों का फल ही न.
केजरीवाल के गुरु जी तो यही कहते हैं कि ये चेले के कर्मों का फल है जो उसे मिला है हालाँकि उनका मुंह इलेक्टोरल बांड वाले वसूली धंधे पर सिला हुआ है , यही वजह कि आम आदमी पार्टी ने भी उनपर हमला साधा और कहा कि उनका विरोध हमेशा सेलेक्टिव होता है, भाजपा का भ्रष्टाचार उन्हें दिखाई नहीं देता। सही कहते हैं सच्चाई मुंह से निकल ही जाती है. 2013 में जब लोग अन्ना की मंशा पर सवाल उठा रहे थे तो लोग उन्हें गाँधी का दूसरा रूप बता रहे थे। दरअसल अन्ना का असली रूप यही है जो आम आदमी पार्टी के नेता दिलीप पांडेय को अब समझ में आया जब उनका लीडर पैसा वसूली के आरोप में कानून की गिरफ्त में है। सिर्फ गुरूजी ही नहीं दिवंगत राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी की बेटी शर्मिष्ठा का भी यही मानना है कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ केजरीवाल कैसे कैसे मनगढंत आरोप लगाकर दिल्ली की सत्ता पर बैठे, ये उन्हीं कर्मों का फल है. ये बात सिर्फ केजरीवाल के गुरु अन्ना हज़ारे या फिर शर्मिष्ठा ही नहीं कह रही हैं, ऐसा ही विचार उन सभी लोगों का है जो कभी केजरीवाल के साथ थे और केजरीवाल ने उन सभी को एक एक करके आम आदमी पार्टी से दूर कर दिया क्योंकि केजरीवाल की महत्वाकांक्षाओं के बीच बाधा बने हुए थे. महत्वाकांक्षा दिल्ली से निकलकर देश में राज करने की और इसी महत्वाकांक्षा ने केजरीवाल को वसूली के धंधे में लगा दिया।

प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने अदालत में यही कहा कि जो पैसा आबकारी नीति में रिश्वत के रूप में वसूला गया उसका इस्तेमाल गुजरात और पंजाब के विधानसभा चुनावों में इलेक्शन लड़ने के लिए किया गया. पंजाब में तो उसे कामयाबी भी मिल गयी हालाँकि गुजरात में दाल नहीं गली लेकिन कांग्रेस पार्टी को कमज़ोर करने का उसका मकसद तो कामयाब हो ही गया, उसका ये मकसद तो 2013 से चल रहा है. पिछले दस सालों में उसकी लड़ाई भाजपा से नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी से है, आज भी है, वो उन सभी राज्यों में पहुंची जहाँ कांग्रेस की सरकार थी या फिर मुख्य विपक्षी पार्टी है और आज वही कांग्रेस पार्टी केजरीवाल की गिरफ़्तारी का विरोध कर रही है. NSUI सड़कों पर प्रदर्शन कर रही है. कांग्रेस नेता निर्वाचन आयोग में जाकर विरोध दर्ज कर रहे हैं. खड़गे, राहुल, प्रियंका समेत हर छोटा बड़ा कांग्रेसी नेता केजरीवाल के समर्थन में.
झूठ की नाव पर सवार होकर मफलर मैन राजनीति की लम्बी और गहरी नदी पार करना चाह रहे थे लेकिन झूठ की नाव से नदी पार नहीं की जा सकती। देश का पीएम बनने का ख्वाब देखने वाला व्यक्ति आज सीएम भी बना रहेगा इसपर सवाल खड़ा हो गया है , हालाँकि आप वाले तो यही कह रहे हैं कि केजरीवाल जेल से सरकार चलाएंगे, यानी उन्हें पक्का यकीन है कि केजरीवाल की गिरफ्तारी सजा में बदलेगी। केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के दूसरे नेताओं की गिरफ़्तारी पर कहा जा रहा है कि ये मोदी सरकार की प्रतिशोध की राजनीति है. हो सकता है ये सही हो, हो सकता है ये राजनीतिक बदला हो. अगर हम देखेंगे तो पाएंगे कि पीएम मोदी का फंक्शन ऑफ़ स्टाइल ऐसा ही है. चूँकि लोकसभा चुनाव हैं इसलिए इस बात पर यकीन करने वाले भी काफी लोग होंगे कि ये बदले की कार्रवाई है, ऐसा सवाल उठाने वाले इस गिरफ़्तारी की टाइमिंग पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन इतनी बड़ी गिरफ्तारी क्या बिना वजह हो सकती है. क्या मोदी जी को नहीं मालूम कि इसका गलत राजनीतिक सन्देश जा सकता है, और क्या ED में इतनी हिम्मत है कि गलत समय पर बिना मर्ज़ी के एक राज्य के मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करे. सवाल तो ये भी है कि मिस्टर क्लीन पूछताछ से इतने समय से भाग क्यों रहे थे, ED ने एक दो नहीं 9 बार समन भेजा और जबतक कोर्ट ने दखल नहीं दिया वो पूछताछ के लिए नहीं गए. जब कर नहीं तो डर कैसा। राहुल और सोनिया को भी बुलाया गया था, उन्होंने तो बस थोड़ा सा समय लिया और सवालों का जवाब देने पहुँच गए, एक दो दिन नहीं कई दिनों तक सवालों के जवाब दिए तो फिर मिस्टर क्लीन सवालों से क्यों भाग रहे थे. धुंआ वहीँ से उठता है जहाँ आग सुलग रही होती है. अब देखना है कि ये सुलगती आग भड़कती है या बुझती है. फिलहाल तो मुझे मिस्टर क्लीन बैरेक में झाड़ू लगाते हुए ही नज़र आ रहे हैं.

