हिंदू धर्म में कई व्रत व त्यौहार बताए गए हैं इनमें से हरियाली तीज के व्रत का महत्व अत्यधिक माना गया है। सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया को पडऩे वाली हरियाली तीज पूरे भारतवर्ष में मनाई जाती है। हिंदू सुहागन महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। जबकि कुंवारी लड़कियां भी मनचाहा वर पाने के लिए इस व्रत को करती हैं। इस त्यौहार को जीवन और खुशियों का त्योहार भी कहा जाता ह.ै हिंदू मान्यताओं के हिसाब से सावन में प्रकृति स्वयं सृष्टि का श्रृंगार करती है। चारों तरफ हरियाली होती है। पूरा माहौल हरे रंग में डूबा होता है। प्रकृति के रंग में रंगी होने की वजह से ही शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज कहा गया है।
मां पार्वती ने रखा था यह व्रत
हिंदू मान्यता और पौराणिक कथाओं के अनुसार हरियाली तीज का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि मां पार्वती ने भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए खुद यह व्रत किया था। मान्यताओं के अनुसार 107 जन्म तक कड़ी तपस्या करने के बाद भी जब भगवान भोलेनाथ प्रसन्न नहीं हुए तब मां पार्वती ने 108वें जन्म में इस व्रत को किया था. इस व्रत के बाद ही भगवान भोलेनाथ ने मां पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी से विवाह किया था। तब से ही इस दिन का सुहागिनों के बीच में अत्यधिक महत्व माना गया है। इस दिन देवी पार्वती और भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए महिलाएं हरे वस्त्र, हरी चूडिय़ां और सोलह श्रृंगार कर सुख शांति और पति की लंबी आयु की कामना करते हैं।
Read also: रुद्र का अभिषेक मिटा देगा हर कष्ट
यह है मुहूर्त
इस साल देशभर में सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया को यानी 10 अगस्त को शाम 6:11 पर हरियाली तीज का आगमन होगा। 11 अगस्त शाम 4:56 मिनट तक तीज रहेगी। शुभ मुहूर्त 11 अगस्त को सुबह 4:24 से 5:17 तक है। दूसरा मुहूर्त 2:30 से 3:07 तक है । इस दिन रवि योग होने से यह अत्यधिक शुभ होगा।
Read also: इस मंगलवार हनुमान की कृपा से इन चार राशियों पर होगी धनवर्षा
यह है व्रत की विधि
हरियाली तीज एक ऐसा पर्व है जो लड़की के पीहर और ससुराल को एक डोर में बांधता है। त्योहार से एक दिन पहले विवाहित कन्याएं अपने पीहर आती हैं। ससुराल से उनका सिंधारा आता है। जिसमें श्रृंगार का सामान, गहने,वस्त्र और अन्य सामान होता है। महिलाएं सज-धज कर झूला झूलती हैं। और मां पार्वती और शिव का पूजन करते हैं इस दिन सुबह उठकर नए कपड़े पहन कर श्रंगार किया जाता है और फिर महिलाएं पूजा का संकल्प करती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी की मूॢत की स्थापना की जाती है और फिर उन्हेंं नए लाल कपड़े के आसन पर विराजमान किया जाता है । सुहाग की सभी चीजें थाली में रखकर भगवान शिव और माता पार्वती को अॢपत करते हैं । जिसके बाद तीज कथा होती है और आरती कर पूजा समाप्त की जाती है इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत भी रखती हैं।

