अपने बच्चों के भविष्य के लिए आंगनवाड़ी में नौकरी के लिए दर दर भटक रही महिला इतना मायूस और निराश हो गयी कि आज महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह के सामने ही अपने दो बच्चों के साथ आत्महत्या करने की बात कह दी. नौकरी छिनने से परेशान यह महिला पिछले चार सालों से अधिकारीयों के आफिसों के चक्कर काट रही है मगर कहीं से इन्साफ नहीं मिल रहा है.
मेरठ के सुख शांतिविहार इलाके में रहने वाली इस महिला के दो बच्चे हैं, इसकी शादी भी महिला आयोग की मदद से ही हुई थी, पति इतना नहीं कमा पाता कि घर का खर्च चल सके. इस महिला का कहना है कि हमने और इस महिला (जो उस समय साथ में ही थी) ने साथ में रजिस्ट्रेशन कराया तो इसे नौकरी मिल गयी लेकिन मुझे क्यों नहीं मिली? मेरा क्या कसूर है, क्या मैं इंसान नहीं हूँ. महिला इससे पहले भी एक बार आत्महत्या का प्रयास कर चुकी है।

इस पीड़ित महिला ने महिला आयोग की सदस्य के सामने ही कहा कि आप ही बताइये एक औरत को अगर न्याय नहीं मिलेगा तो वह क्या कर सकती है, वह तो जान ही दे सकती है, अगर मुझे न्याय नहीं मिला तो मैं अपने दोनों बच्चों के साथ ज़हर खाकर जान दे दूँगी। महिला का 9 साल का बेटा मेडिकल के सामने चाय बेचता है और जो पैसे लाता है उसी से स्कूल फीस भरता है और घर का खर्च चलता है.
इस पूरे प्रकरण में महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह का मानवीय चेहरा नज़र आया. सुषमा सिंह ने न सिर्फ महिला के मामले में अधिकारीयों को फटकार लगाईं और सही कार्रवाई करने की हिदायत दी वहीँ उन्होंने बच्चे की पढाई के लिए खुद ज़िम्मेदारी ली और किसी अधिकारी से इस सिलसिले में बच्चे का एडमिशन कराने की बात भी की. साथ ही पीड़ित महिला के लिए भी किसी स्कूल में आया की नौकरी का इंतज़ाम करने का अनुरोध किया। उम्मीद है पीड़ित महिला को महिला आयोग की सक्रियता से न्याय मिलेगा।

