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बनारस में मोदी ने खेला राम कार्ड, रील के राम के भरोसे प्रचार

उत्तर प्रदेशबनारस में मोदी ने खेला राम कार्ड, रील के राम के भरोसे...

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पारुल सिंघल

आम लोकसभा चुनाव 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भाजपा की सफलता को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। छह चरणों की वोटिंग से साफ हो चुका है कि भाजपा का किला अब कभी भी दरक सकता है। इस बार भाजपा जहां बिना मुद्दे के चुनावों में शामिल है वहीं विपक्ष का पलड़ा पहले के मुकाबले काफी मजबूत दिखाई दे रहा है। अपने पैर उखड़ते देख बौखलाई भाजपा ने एक तरफ हिंदू मुस्लिम मुद्दे को हवा दे दी है। वहीं अपनी हॉट सीट बनारस जिस पर खुद प्रधानमंत्री चुनाव लड़ते हैं उसे भी श्री राम के हवाले कर दिया है। मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट से रामायण सीरियल के राम यानी अरुण गोविल को चुनाव लड़वाने के बाद अब प्रधानमंत्री ने अपने प्रचार के लिए उन्हें बनारस में उतारा है।

कितना कारगर होगा राम कार्ड
मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर हुए प्रचार का ट्रेंड भाजपा ने बनारस में भी चलाया है। यहां भी रील के राम यानी अरुण गोविल राम बनकर लोगों के बीच जनसंपर्क कर रहे हैं। सभाओं में खुद को श्री राम बता रहे हैं और प्रधान मंत्री के लिए वोट मांग रहे हैं। हालांकि मेरठ में भाजपा का राम कार्ड कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाया है। ऐसे में बनारस में रील के राम कितने कारगर होंगे ये आने वाले दो दिनों में साफ हो जाएगा।

मेरठ से गायब हुए राम
अरुण गोविल यानी रील के राम मेरठ से पूरी तरह गायब हो चुके हैं। खुद को श्री राम समझ रहे अरुण ने फिलहाल मेरठ से किनारा कर लिया है। 26 अप्रैल को हुए मतदान के बाद उन्होंने यहां की ओर स्थाई रुख नहीं किया। यहां तक कि चुनाव प्रचार के लिए अन्य सीटों पर राम बनकर घूम रहे अरुण गोविल को यहां विकास के मुद्दों से भी कोई सरोकार नहीं हैं।

क्या फीका पड़ रहा मोदी का जादू
बनारस सीट पर राम का सहारा लेकर चुनाव लड़ने जा रहे नरेंद्र मोदी के जादू पर भी अब सवाल खड़े होने लगे हैं। तमाम धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही राम मंदिर जैसे मुद्दों को उछाल रहे मोदी को लेकर राजनैतिक विश्लेषक अलग ही राय देख रहे हैं। कई विश्लेषकों का यह भी मानना है कि अब मोदी का जादू लोगों के मन से उतरने लगा है। बीते 10 सालों में महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं में तेजी से इजाफा हुआ है। लोगों के मन से न केवल भाजपा सरकार का विश्वास कम हुआ है। बल्कि नरेंद्र मोदी को लेकर भी लोगों की राय अब बदलने लगी है। इसी के चलते भाजपा राम मंदिर जैसे मुद्दे को कैश करने में लगी हुई है

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