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मोदी जी का बयान, रणनीति या बौखलाहट

आर्टिकल/इंटरव्यूमोदी जी का बयान, रणनीति या बौखलाहट

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अमित बिश्नोई
देश का प्रधानमंत्री जब विपक्षी पार्टी पर ये आरोप लगाए कि बहुसंख्यक समाज की संपत्ति और उस समाज की महिलाओं के गहने यहाँ तक कि मंगलसूत्र मुसलमानों में बाँट देगा तो अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि देश की राजनीति कहाँ जा चुकी है. प्रधानमंत्री मोदी सिर्फ आरोप नहीं लगा रहे हैं बल्कि ये भी कह रहे हैं कि ये कांग्रेस के मेनिफेस्टो में लिखा है. कांग्रेस का मेनिफेस्टो आये हुए एक हफ्ता हो चूका है, उसका लोग पोस्टमॉर्टेम भी कर चुके हैं पर किसी को भी वो बात नहीं लिखी दिखी जिसका ज़िक्र राजस्थान के बाड़मेर की चुनावी सभा में प्रधानमंत्री मोदी ने किया। प्रधानमंत्री के इस बयान पर एक हंगामा मच गया है, कांग्रेस पार्टी का तो इस बयान पर जो भी स्टैंड है वो अपनी जगह है लेकिन राजनीति से अलग हटकर भी लोग कहने लगे हैं कि आखिर प्रधानमंत्री को इस तरह के बयान देने की ज़रुरत क्यों पड़ गयी.

प्रधानमंत्री के पूरे बयान को अगर सुनेंगे तो ये खुली हुई हेट स्पीच लग रही है, खुलेआम चुनाव अचार संहिता का उल्लंघन लग रहा है. कायदे से तो अबतक चुनाव आयोग को उन्हें नोटिस भेज देना चाहिए था और संचार माध्यमों को निर्देश भी जारी कर देना चाहिए था कि वो प्रधानमंत्री के इस बयान को आगे न चलाये लेकिन चुनाव आयोग अबतक पूरी तरह खामोश है. प्रधानमंत्री का ये कहना कि ये सब कांग्रेस पार्टी के मेनिफेस्टो में लिखा है, चुनाव आयोग पर और बड़ा सवाल खड़ा करता है. अगर एक राष्ट्रिय पार्टी के घोषणा पत्र में इस तरह की कोई बात लिखी है तो उसने अबतक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की. इसका मतलब साफ़ है कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में ऐसा कुछ नहीं लिखा है जिसपर चुनाव आयोग कार्रवाई कर सके, अगर ऐसा होता तो अबतक कार्रवाई हो चुकी होती, इसका मतलब ये भी है कि प्रधानमंत्री मोदी चुनाव जीतने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. देश के 20 करोड़ मुसलमानों को खुले आम घुसपैठिया बता सकते हैं.

चलिए पहले आपको बाड़मेर में प्रधानमंत्री ने क्या कहा उसको शब्दशः बताते हैं, प्रधानमंत्री ने रविवार को राजस्थान के बाड़मेर में एक चुनावी सभा को सम्बोधित करते हुए कहते हैं कि “उन्होंने कहा है कि अगर कांग्रेस पार्टी की सरकार बनेगी तो हर एक की प्रॉपर्टी का सर्वे किया जायेगा, हमारी बहनों के पास सोना कितना है उसकी जांच की जाएगी, उसका हिसाब लगाया जायेगा, हमारे आदिवासी परिवारों में चांदी होती है, सिल्वर कितना है उसका हिसाब लगाया जायेगा, सरकारी मुलाज़िमों के पास कितना पैसा, सम्पति कहाँ है , नौकरी कहा है उसकी जांच की जाएगी। इतना ही नहीं, आगे क्या कहा है ये जो गोल्ड है बहनों का और जो संपत्ति है वो सबको समान रूप से वितरित कर दी जाएगी, क्या ये आपको मंज़ूर है क्या? आपकी संपत्ति को सरकार को ऐंठने का अधिकार है क्या? मेरी माताओं बहनों की ज़िन्दगी में सोना सिर्फ शो करने के लिए नहीं होता है, उसके स्वाभिमान से जुड़ा हुआ है. उसका मंगलसूत्र कोई सोने की कीमत का मुद्दा नहीं है, उसके जीवन के सपनों से जुड़ा हुआ है. तुम उसे छीनने की बात कर रहे हो मेनिफेस्टो में, गोल्ड ले लेंगे सबको वितरित कर देंगे, और पहले जब उनकी सरकार थी उन्होंने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलामानों का है. इसका मतलब ये संपत्ति इकठ्ठा करके किसको बांटेंगे, जिनके ज़्यादा बच्चे हैं उनको बाँटेंगे, घुसपैठियों को बाँटेंगे, क्या आपकी मेहनत की कमाई का पैसा घुसपैठियों को दिया जायेगा, आपको मंज़ूर है ये? ये कांग्रेस का मेनिफेस्टो कह रहा है कि वो माताओं और बहनों के सोने का हिसाब करेंगे, उसकी जानकारी लेंगे और फिर उस संपत्ति को बाँट देंगे और उनको बांटेंगे जिनको मनमोहन सिंह की सरकार ने कहा था कि संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है. भाइयों बहनों ये अर्बन नक्सल की सोच, माताओं और बहनों ये आपका मंगल सूत्र भी बचने नहीं देंगे।

ज़ाहिर सी बात है कि इस बेबुनियाद आरोप पर कांग्रेस का पलटवार होना ज़रूरी था, कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने मोदी को देश की मर्यादा को तार तार करने वाला प्रधानमंत्री बताया जो चुनाव जीतने के लिए किसी भी हद तक गिर सकता है, वहीँ राहुल गाँधी ने इस मोदी की बौखलाहट बताया और कहा कि उन्हें सामने हार दिखाई देने लगी है, सुप्रिया श्रीनेत ने तो प्रधानमंत्री को निर्लज्ज और घोर साम्प्रदायिक बता डाला। पूर्व कांग्रेसी और मशहूर वकील प्रधानमंत्री के इस बयान से बहुत आहत नज़र आये. सिब्बल ने तो यहाँ तक कह दिया कि मोदी को ऐसा तो आरएसएस ने भी नहीं सिखाया होगा, प्रधानमंत्री ने बाड़मेर में जो बात कही आरएसएस की ऐसी संस्कृति नहीं है, मोहन भगवत को सामने आकर अपनी राय रखनी चाहिए। सिब्बल ने कहा कि सारा देश प्रधानमंत्री पद की इज़्ज़त करता है लेकिन जब प्रधानमंत्री ही अपने पद की इज़्ज़त न करे तो लोगों को सामने आकर विरोध करना चाहिए। सिब्बल ने चुनाव आयोग की खामोशी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उसे नहीं भूलना चाहिए कि उसने संविधान की शपथ ली है.

सवाल उठता है कि जिस व्यक्ति को इस बात का यकीन है कि इस बार उसे 400 से ज़्यादा सीटें मिलनी जा रही हैं उसे इस तरह के साम्प्रदायिक बयानों की ज़रुरत क्यों पड़ गयी. क्या उसे लगने लगा है कि सिर्फ गारंटियों से काम नहीं चलने वाला, क्या उसे अपनी गारंटियों पर यकीन नहीं रहा जो उसने सीधे सीधे अब हिन्दू मुसलमान करना शुरू कर दिया है. क्या उसे अब उस राम पर भरोसा नहीं रहा कि वो अपने सबसे बड़े भक्त का बेड़ा पार लगाएंगे। क्या उसे अपने दस साल के कामों पर थोड़ा भी यकीन नहीं कि उसे उसके कामों पर वोट मिल जायेंगे। देखा जाय तो पहले चरण के मतदान के बाद प्रधानमंत्री के चुनावी भाषणों में उग्रता आ गयी है और अब वो कांग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी पर व्यक्तिगत हमले करने लगे हैं. क्या विपक्ष पहले चरण के बाद जिस तरह उत्साहित है और 400 के मुकाबले 150 की बात कर रहा है उससे प्रधानमंत्री विचलित हैं. या फिर वो महिलाओं की सबसे कमज़ोर नस पर ऊँगली रखकर और उनमें एक डर पैदा कर वोटों का ध्रूवीकरण करने की कोशिश में हैं। ये सभी को मालूम है कि भारतीय महिलाओं के लिए सोने का क्या महत्त्व होता है और उसमें मंगलसूत्र का महत्त्व तो आभूषण से अलग हटकर भावनात्मक है. तो क्या ये सत्ता के लिए हिन्दू महिलाओं की भावनाओं को भड़काने का एक कुत्सित प्रयास है. आप इसे मोदी जी की बौखलाहट मानते हैं या फिर रणनीति। अगर ये रणनीति है तो बड़ी निंदनीय है.

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