मेरठ। पश्चिमी विक्षोभ के कारण आकाश में काफी ऊंचाई पर हल्के बादलों के चलते रात के तापमान में मामूली बढ़ोत्तरी हो रही है। जबकि दिन के तापमान में अब कुछ कमी आ रही है। मौसम विभाग के अनुसार मेरठ और आसपास के जिलों में आने वाले एक सप्ताह तक इसी तरह मौसम रहने की संभावना बनी हुई है। हवा में नमी मात्रा कुछ कम होने से धुंध में इजाफा हो रहा है। मौसम विभाग ने नवंबर के दूसरे सप्ताह से धुंध और अधिक बढ़ने की संभावना जताई है।
मौसम विज्ञानी डा.एन सुभाष ने बताया कि आने वाले दिनों में धूप खिली रहेगी। लेकिन सूरज की तपिश में कुछ कमी आ सकती है। इसके कारण तापमान में उतार चढ़ाव हो सकता है। उन्होंने बताया कि हिमालय पर बन रहा नया पश्चिमी विक्षोभ मैदानी क्षेत्र में प्रभाव डालेगा। इससे बादलों की आवाजाही तेज होगी। न्यूनतम तापमान 15.2 डिग्री और अधिकतम तापमान 32:4 डिग्री दर्ज किया गया।
डा0 एन सुभाष ने वातावरण में छा रही धुंध के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सर्दी के मौसम में आर्द्र (नम) हवा ऊपर उठकर ठंडी होती है तो जलवाष्प संघनित होकर जल की सूक्ष्म बूंदें बनाता हैं। इसी को कोहरा कहा जाता है। जब इन सूक्ष्म बूंदों में धुआं व धूल के सूक्ष्म कण शामिल हो जाते हैं तो धुंध बन जाती है। इन दिनों हिमालय पर आए पश्चिमी विक्षोभ के कारण प्रति चक्रवात विकसित हो रहा है। जिसके कारण अरब सागर व बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवा में बढ़ोत्तरी होने के साथ ही धुंध में इजाफा हो रहा है।
मौसम विज्ञानी डा. एन सुभाष ने बताया कि वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ हिमालय के पूर्वी क्षेत्र के पास है। जिसका प्रभाव मैदानी क्षेत्र में पड़ रहा है। हवा में अधिकतम आर्द्रता 80 फीसद से ज्यादा है। यही हवा वायुमंडल में ऊपर उठकर रात में और सुबह धुंध बनकर छा रही है। मौसम विज्ञानी ने बताया कि शहर में प्रदूषण की मात्रा अधिक है, ऐसे में धुंध की चादर और गहरी हो जाती है।
आज सोमवार रात से एक और पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालय को प्रभावित करेगा। इससे नम हवा तेजी से मैदानी क्षेत्र में आएगी और इसके बाद सुबह व शाम धुंध और अधिक बढ़ने के आसार हैं। जहां प्रदूषण की मात्रा कम होगी। वहां कोहरा पड़ने की संभावना है। ऐसे में दृश्यता में कमी आएगी।
मौसम विभाग के अनुसार दीपावली के बाद से रात में ओस की मात्रा में इजाफा हुआ है। चूंकि दिन के समय पृथ्वी गर्म होती है और रात में तापमान करीब आधा हो रहा है। इसके कारण जमीन का तापमान रात में काफी कम हो जाता है और इसके संपर्क में आने वाली हवा में मौजूद जलवाष्प संघनित होकर सूक्ष्म बूंदों यानी ओस के रूप में जमा होती है।

