सेंटर बना, लाखों का जनरेटर लगा मगर एमआरआई मशीनों का पता नहीं

मेरठ रीजनसेंटर बना, लाखों का जनरेटर लगा मगर एमआरआई मशीनों का पता नहीं

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सेंटर बना, लाखों का जनरेटर लगा मगर एमआरआई मशीनों का पता नहीं

जिला अस्पताल में एमआरआई कराने के लिये परेशान हैं मरीज
सेंटर पर लगा ताला, धूल फांक रहा है लाखों रुपए का साउंडप्रूफ जनरेटर

मुनीश कुमार

मेरठ। ऐसा नहीं की हमारे पास संसाधन नहीं मगर उनका उपयोग करने की इच्छाशक्ति और कार्यप्रणाली हमारे स्वास्थ अधिकारियों में नहीं है। इसकी बानगी देखनी है तो आईये जिला अस्पताल में जहां एमआरआई सेंटर बना दिया गया। लाखों रुपये का जनरेटर भी लगाया गया। मगर मशीन न होने के कारण इस सेंटर के चैनल गेट पर सालों से ताला लटका हुआ है। वहीं जिला अस्पताल में आने वाले मरीज एमआरआई की सुविधा न मिलने के कारण परेशानी का सामना कर रहे हैं।

कहने को तो मेरठ के जिला अस्पताल में तमाम आधुनिक जांच सुविधाएं मौजूद हैं मगर मरीजों को उनका लाभ नहीं मिल पाता। लेकिन हद इस बात की है की इसी चिकित्सालय में एक एमआरआई सेंटर बना हुआ है जहां एमआरआई करने के लिये मशीनें ही नहीं हैं। हां, बिल्डिंग जरूरी आधुनिक तरीके से बनाई गयी है और यहां पाॅवर सप्लाई के लिये लाखों रुपए का साउंडप्रूफ जनरेटर भी लगाया गया है। मगर यह दिखावटी इंतजाम मरीजों के लिये बेमानी हैं क्योंकि यहां एमआरआई मशीन न होने के कारण उन्हें बाहर से जांच करानी पड़ती है। एमआरआई कराने के लिये मरीजों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इस बिल्डिंग के चैनल गेट पर पिछले कई सालों से ताला लटका हुआ है। मगर अस्पताल प्रबंधन मरीजों की इस परेशानी को दूर करने के लिये कोई सार्थक प्रयास नहीं कर रहा है।

इस संबध में जिला अस्पताल के सीएमएस ने बताया कि इस एमआरआई सेंटर को बने हुए दो साल से अधिक समय गुजर चुका है। स्ट्रक्चर बना दिया गया, एमआरआई सेंटर का नाम भी दिया गया, जनरेटर भी मिला लेकिन मशीनों का अता-पता नहीं है। आवश्यक मशीन न होने के कारण मरीजों को एमआरआई जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है।

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