मेरठ। Meerut Vidhan Sabha Seats 2022 – मेरठ मंडल की पांचों जिलों की विधानसभा सीटों पर गजब का मुकाबला इस बार दिखाई दे रहा है। मंडल में मेरठ,गाजियाबाद, हापुड, बुलंदशहर, नोएडा,बागपत जैसे जिले आते हैं। इन जिलों की विधानसभा सीटों में कहीं दिग्गजों के बीच सीधा मुकाबला है तो कहीं समीकरणों की लड़ाई के बीच जातीयता हावी है। कुल मिलाकर चुनाव में मुकाबला जोरदार है।
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नोएडा में सीधा मुकाबला
नोएडा में इस बार भाजपा और गठबंधन के अलावा बसपा भी मुकाबले में है। नोएडा से भाजपा से पूर्व विधायक पंकज सिंह पर ही भरोसा जताया है। पंकज सिंह रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के बेटे हैं। यहां से गठबंधन ने सुनील चौधरी को टिकट दिया है। बसपा ने किसान नेता मनवीर भाटी को उतारा है। यहां पर मुकाबला त्रिकोणीय हैं। जेवर विधानसभा सीट पर भाजपा ने धीरेंद्र सिंह 2017 में मीरापुर में भाजपा विधायक रहे अवतार सिंह भड़ाना के बीच सीधी टक्कर है। अवतार सिंह भड़ाना इस बार सपा-रालोद गठबंधन से प्रत्याशी हैं। बसपा से नरेंद्र भाटी को टिकट देकर मुकाबला काफी जोरदार कर दिया है।
प्रतिष्ठा का प्रश्न बनीं मेरठ की सीटें
मेरठ में भाजपा का वर्चस्व 2017 में रहा था। यहां पर सिर्फ एक सीट विपक्ष के खाते में गई थी वह भी मेरठ शहर सीट। उसके अलावा सभी विधानसभा सीटों पर कमल खिला था। इस बार कई सीटें प्रतिष्ठा केे बीच फंसी हुई हैं। सिवालखास में रालोद के बीच जहां टिकट को लेकर असंतोष है। वहीं यहां पर भाजपा प्रत्याशी को भी कई जगहों पर विरोध का सामना करना पड़ा है। रूठने मनाने के बीच भाजपा और गठबंधन के प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर है। इस सीट पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। बात सरधना की करें तो इस बार भाजपा के लिए यहां पर राह आसान नहीं है। यहां पर भाजपा के संगीत सोम पिछले दो बार से विधायक हैं। इस बार भी इस सीट पर अतुल प्रधान चुनाव लड रहे हैं। जो कि सपा के टिकट पर गठबंधन से प्रत्याशी हैं। मुकाबले में अतुल पूरी मजबूती के साथ मैदान में हैं। हस्तिनापुर इस बार अपनी पुरानी परंपरा को तोड़ पाएगा या नहीं इसको लेकर सबकी नजर इस सीट पर है। यहां से भाजपा सरकार के राज्यमंत्री दिनेश खटीक की प्रतिष्ठा दांव पर हैं तो दूसरी ओर पूर्व विधायक योगेश वर्मा भी मजबूत उम्मीदवार माने जा रहे हैं। इसके अलावा मेरठ दक्षिण, मेरठ कैंट और मेरठ किठौर भी भाजपा के लिए इस बार उतना आसान नही ंजितना कि पहले 2017 में रहा था।
बागपत में प्रत्याशियों के विरोध के बीच मतदताओं ने साधी चुप्पी :
कभी रालोद का गढ रहा जिला बागपत इस बार काफी कुछ उतटफेर करने की स्थिति में है। यहां का मतदाता किस करवट ऊंट बैठाएगा यह तो 10 मार्च को पता चलेगा। बागपत में भी कहीं रालोद के उम्मीदवार का विरोध हो रहा है तो कहीं भाजपा उम्मीदवार पर गोबर और उपले फेककर स्वागत किया जा रहा है। छपरौली केा रालोद का अभेद्य किला कहा जाता रहा है। लेकिन 2017 में रालोद का यह किला भाजपा ने ढा दिया था। इस बार यहां पर कड़ा मुकाबला है। बागपत शहर सीट पर अहमद हमीद रालोद से चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं भाजपा के विधायक और प्रत्याशी योगेश धामा कड़ी टक्कर दे रहे हैं। मुकाबला काुी कड़ा है। भाजपा से विधायक केपी मलिक बड़ौत से ताल ठोक रहे हैं तो रालोद से जयवीर सिंह तोमर उनके लिए चुनौती बने हुए हैं। जयवीर पहली बार चुनाव मैदान में हैं। जिले में मुस्लिम और जाटों के वोटों को ध्रुवीकरण की कोशिश में भाजपा है तो अन्य बिरादरी की वोटों पर विपक्षियों के उम्मीदवार की नजर टिकी है। भाजपा ने जिले की तीनों सीटों को जीतने के लिए पूरी रणनीति बनाई है।
गाजियाबाद और हापुड़ में मुकाबला सीधा
गाजियाबाद जिले में भी इस बार काफी दिलचस्प चुनावी मुकाबला है। लोनी विधानसभा सीट से सपा-रालोद से माफिया रहे मदन भैया सपा—रालोद गठबंधन से मैदान में हैं तो भाजपा ने विधायक नंद किशोर गुर्जर को मैदान में उतारा है। नंद किशोर अपने बयानबाजी को लेकर हमेशा से सुर्खियों में रहे हैं। मोदीनगर विधानसभा सीट से भाजपा के अजित पाल त्यागी और गठबंधन प्रत्याशी पूर्व विधायक सुदेश शर्मा के बीच कड़ी टक्कर है। हापुड़ की धौलाना सीट पर भाजपा लहर के बाद भी हाथी दौड़ा था और यहां से बसपा के असलम अली जीते थे। इस बार असलम अली गठबंधन से प्रत्याशी हैं। भाजपा ने इस बार इस सीट पर धर्मेश तोमर को मैदान में उतारा है जिससे दोनों के बीच कड़ा मुकाबला बताया जा रहा है।
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जातीय समीकरण के सहारे बुलंदशहर :
बुलंदशहर जिले में जातीय समीकरण की बयार बह रही है। यहां पर भाजपा ने भी जातीय राजनीति को ध्यान में रखते हुए ही टिकट बांटे हैं। स्याना विधानसभा जो कि लोधी वोटर बाहुल्य हैं यहां भाजपा ने देवेंद्र लोधी पर दांव खेला है। देवेंद्र भाजपा के लिए यह सीट 2017 में जीत चुके हैं। बसपा और कांग्रेस ने यहां ब्राह्मण कार्ड खेला है। जिसमें सुनील भारद्वाज और पूनम पंडित को उतारा है। शिकारपुर में भाजपा ने ब्राह्मण कार्ड खेलते हुए ब्राहमण को टिकट दिया है।

