कल से शुरू हुए विधानसभा सत्र में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा अपने अभिभाषण में हर मामले में योगी सरकार को क्लीन चिट देने पर प्रतिक्रिया देते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने सवाल किया कि यह अभिभाषण क्या जनता की उपेक्षा जैसा नहीं? मायावती ने कहा कि सरकारी दावों की सार्थकता तभी होती है जब वह धरातल पर भी नज़र आते हों और जनता को भी दिखाई पड़ते हों।
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मायावती ने प्रेस को जारी अपने बयान में कहा कि जिन लोगों के लिए कानून के राज के कोई मायने नहीं उनके अच्छे दिन ज़रूर आये हैं, फिर वह चाहे रेट माफिया हों या फिर ठाणे में घुसकर पुलिस की पिटाई करने वाले ही क्यों न हों। मायावती ने कहा कि प्रदेश में विकास और गवर्नेंस की हालत खराब है और आम जनता का बड़ा बुरा हाल है जो लगातार और भी बुरा होता जा रहा है। मायावती ने कहा कि सरकार को जनकल्याण और विकास के सही काम करके दिखाने होंगे क्योंकि जनता महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, अराजकता, जातिवाद, साम्प्रदायिकता, भ्रष्टाचार, गुण्डागर्दी व माफियागिरी और बदतर कानून-व्यवस्था से काफी त्रस्त है।
मायावती ने इसके साथ ही कल सदन में सपा सदस्यों द्वारा हंगामे पर भी खिंचाई करते हुए कहा कि ’’राज्यपाल वापस जाओ’’ का नारा लगाना उचित नहीं था, क्योंकि राज्यपाल महोदय तो वही पढ़ रही थीं जो सरकार ने उन्हें लिखकर दिया था, इसलिए गवर्नर को न घेरकर विपक्ष सरकार को घेरे तो ज़्यादा बेहतर होगा।
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मायावती ने मुफ्त राशन पर चल रहे विवाद पर भी योगी सरकार को घेरा, मायावती ने कहा कि राशनकार्ड के सत्यापन की आड़ में जो निरस्त्रीकरण की बाते हो रही हैं वह बहुत गलत हैं, इन्ही गरीब लोगों ने मुफ्त राशन के कारण विधानसभा चुनाव में भाजपा को वोट दिया यही और चुनाव बाद उनसे मुफ्त राशन का हक़ छीन लेना उनके साथ सरकार की नाइंसाफी होगी।

