अखिलेश की ‘तरुप चाल’ को ‘काउंटर’ करने में जुटीं माया

उत्तर प्रदेशअखिलेश की ‘तरुप चाल’ को ‘काउंटर’ करने में जुटीं माया

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अखिलेश की ‘तरुप चाल’ को ‘काउंटर’ करने में जुटीं माया

जानिए, मुसलमान प्रत्याशी और रिजर्व सीटों पर जातीय गोलबंदी का बीएसपी का फार्म्युला

ऊषा सिंह

मुसलमान प्रत्याशी और जातीय गोलबंदी। बीएसपी प्रमुख मायावती का ये नया फॉर्म्युला है। ये फॉर्म्युला  कई दलों से गठबंधन कर रहे सपा मुखिया अखिलेश यादव की चाल को काउंटर करने के लिए तैयार किया है। इसके तहत मुसलमानों को इस बार ज्यादा टिकट देने की तैयारी है। वहीं रिजर्व सीटों पर वह खासतौर से पश्चिमी यूपी को फोकस कर रही हैं। रिजर्व सीटों पर अतिपिछड़ों, जाट, मुसलमानों के साथ ही ब्राह्मणों को एकजुट किया जा रहा है। दलितों के साथ इन जातियों का समर्थन मिल जाता है तो बीएसपी की मुश्किल राह आसान हो जाएगी। इन रिजर्व सीटों के जरिए आसपास की अन्य सीटों पर माहौल बनाने की तैयारी है।

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बीएसपी से नाराज वोटरों पर नजर
जहां बीजेपी और सपा पूर्वांचल में चुनाव प्रचार पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। वहीं मायावती का पूरा ध्यान पश्चिमी यूपी पर है। इसकी वजह है कि पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन के बाद से बीजेपी से नाराज वोटर को अपनी ओर आकर्षित करना। सपा ने इसके लिए आरएलडी से गठबंधन किया है। वहीं बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने सबसे पहले वहां की रिजर्व सीटों  पर अपनी सभाएं रखी हैं। बीएसपी यह मानकर चलती है कि दलित तो उसका बेस वोटर है। इसके साथ साथ अन्य जातियों को  जोड़ने के लिए  खुद मायावती ने जाट, मुसलमान और अतिपिछड़ा  वर्ग के पदाधिकारियों को वहां जिम्मेदारी दी है। वहीं सतीश चंद्र  मिश्र ब्राह्मणों को जोड़ने  के लिए  जुटे हैं। कोशिश यह कि यदि शुरुआत में इन रिजर्व सीटों  पर माहौल बन जाएगा तो उसका फर्क आसपास की सीटों पर भी पड़ेगा।

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मुसलमान प्रत्याशियों से आस
मुसलमान एक बड़ा वर्ग है जो माना जाता  है कि बीजेपी को वोट नहीं करेगा। ऐसे में उनके वोट लेने के लिए सपा और बीएसपी के बीच लड़ाई है। मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग सपा के साथ जाता है। यही वजह है कि बीएसपी उनको अपनी ओर लाने के  लिए बड़ी संख्या में मुसलमान प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है। इसकी झलक अभी प्रभारी/प्रत्याशी घोषित करने में दिख रही है। लखनऊ में अब तक आठ विधान सभा सीटों पर प्रभारी घोषित किए जा चुके हैं। इनमें से चार मुसलमान हैं। पश्चिमी यूपी में भी कई मुसलमान प्रभारी घोषित किए जा चुके हैं। 

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