नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड SEBI ने म्युचुअल फंड, ब्रोकिंग और वैकल्पिक निवेश फंड AIF में कई बदलाव किए हैं। जिनका दूरगामी असर होगा। बाजार में किसी बड़ी उथलपुथल से डेट म्युचुअल फंडों को बचाने के मकसद से नियामक ने उनके लिए 33,000 करोड़ रुपये के आपात ऋण कोष का रास्ता तैयार कर दिया। यानी म्यूचुअल फंड पर अब बाजार की उथल पुथल का अधिक असर नहीं पडे़गा।
सुरक्षित रहेगी निवेशकों की राशि
ब्रोकरों के पास पड़ी निवेशकों की राशि सुरक्षित रखने के लिए नियामक ने द्वितीयक बाजार के लिए अस्बा जैसी सुविधा का विकल्प रखा है। ग्राहकों की रकम की जानकारी रोज दिए जाने की व्यवस्था को मंजूरी दे दी है। इसके तहत निवेशक ब्रोकरों को लांघते हुए अपनी रकम सीधे क्लियरिंग कॉरपोरेशन के पास रख सकते हैं और उस पर ब्याज भी कमा सकते हैं।
सेबी चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच ने कहा कि नियामक ने पहले ग्राहकों की प्रतिभूतियां या शेयर बचाने के उपाय किए और अब हम निवेशकों की नकदी बचा रहे हैं। इससे व्यवस्था के भीतर जोखिम पूरी तरह खत्म हो जाएगा। हम अपने बाजारों में कार्वी जैसा कोई और कांड नहीं होने दे सकते।
मगर उन्होंने अदाणी मसले पर कुछ भी बोलने से यह कहकर इनकार कर दिया कि मामला अदालत में है और जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन करेंगे।
सेबी के निदेशक मंडल ने स्व-प्रायोजित संपत्ति प्रबंधन कंपनियों AMC की व्यवस्था को भी मंजूरी दे दी। प्रायोजक मुक्त एएमसी बनने के लिए सकारात्मक तरलता वाली नेटवर्थ होनी चाहिए और पिछले पांच साल में कम से कम 10 करो. रुपये का शुद्ध मुनाफा भी होना चाहिए।
सेबी ने म्युचुअल फंड न्यासियों की भूमिका अधिक स्पष्ट करने के लिए नियमों में बदलाव भी मंजूर कर दिए। बुच ने कहा कि न्यासियों को उन क्षेत्रों में अहम भूमिका निभानी होगी, जहां यूनिटधारकों और शेयरधारकों के बीच टकराव हो सकता है।
कई निदेशक कंपनियों में हमेशा बोर्ड में शामिल रहते हैं। इस प्रवृत्ति को खत्म करने के लिए सेबी ने कंपनी प्रशासन के नियम भी सख्त कर दिए। एआईएफ उद्योग पर पकड़ बढ़ाते हुए सेबी ने उनके निवेश पोर्टफोलियो का मूल्यांकन और स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ता की नियुक्ति अनिवार्य कर दी है। 500 करोड़ रुपये से अधिक राशि वाली सभी एआईएफ योजनाओं को अपनी इकाइयां डीमैट स्वरूप में करनी होंगी। सेबी सूचकांक प्रदाताओं को भी अपने अधिकार क्षेत्र में ले आया।
किसी सूचकांक में निवेशक अपनी रकम रखते हैं तो उसे सेबी के पास पंजीकरण कराना ही होगा। सूचकांक प्रदाताओं को कायदे में रखने के लिए अभी कोई व्यवस्था नहीं है और सेबी इस खामी को दूर करना चाहता था। यदि एमएससीआई और एफटीएसई जैसे वैश्विक सूचकांक प्रदाता सेबी के पास पंजीकरण नहीं कराते हैं तो देसी संपत्ति प्रबंधक उन्हें बेंचमार्क नहीं मान पाएंगे।

