जातीय सोशल इंजीनियरिंग के साथ ‘यूथ मैकेनिज्म’

उत्तराखंडजातीय सोशल इंजीनियरिंग के साथ ‘यूथ मैकेनिज्म’

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जातीय सोशल इंजीनियरिंग के साथ ‘यूथ मैकेनिज्म’

  • बीएसपी ने पहले चरण की 53 सीटों पर टिकट फाइनल किए
  • सवर्ण, ओबीसी और मुसलमानों को बराबर टिकट, इनमें 50 फीसदी युवा

ऊषा सिंह

लखनऊ। बीएसपी के टिकट बंटवारे में एक बार फिर पुरानी सोशल इंजीनियरिंग दिखी है लेकिन एक खास बात है जो इसे पहले से अलग बनाती है। वह है यूथ मैकेनिज्म । पहले चरण की 58 में से 53 सीटों के प्रत्याशियों का ऐलान पार्टी ने किया है। इनमें 50 फीसदी से ज्यादा युवा चेहरों पर पार्टी ने दांव लगाया है। वहीं जातिवार देखा जाए तो 15 सवर्ण, 15 ओबीसी और 14 मुसलमानों को टिकट दिया गया है। वहीं आरक्षित सीटों पर 9 एससी/एसटी प्रत्याशियों को टिकट मिला है।
 
ब्राह्मण रास आए बीएसपी ने 2007 में पहली बार पूरे बहुमत से सत्ता में आई थी। तभी राजनीति में सोशल इंजीनियरिंग शब्द आया। ऐसा कहा जाता है कि तब दलित और ओबीसी के साथ ब्राह्मणों ने भी साथ दिया था। इस बार भी बीएसपी लगातार 2007 को दोहराने की बात कर रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए अपने पुराने सोशल इंजीनियर सतीश चंद्र मिश्र को सबसे  पहले मैदान में उतारा। वह  जुलाई से ही ब्राह्मण सम्मेलन कर रहे हैं। इस बार भी टिकटों में भी ब्राह्मणों को तवज्जो दी गई है। कुल 15 सवर्ण प्रत्याशियों में 10 ब्राह्मण हैं।  

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बेस वोट के साथ प्रत्याशी के वोट

बीएसपी नेताओं का कहना है कि सवर्ण, ओबीसी और मुसलमानों को बराबर टिकटों का बंटवारा सोशल इंजीनियरिंग का ही एक उदाहरण है। इस बार इंजीनियरिंग में बेस वोट बैंक और प्रत्याशी के वोटों को ध्यान में रखा गया है। दलित पार्टी का बेस वोटर है। हर सीट पर प्रत्याशी ऐसा चुना गया है जहां दलित दूसरी अन्य जाति के ज्यादा वोटर हैं। वहीं कुछ सीटों पर दूसरी पार्टियों के प्रत्याशियों के समीकरण भी ध्यान में रखे गए हैं।

नए चेहरों पर दांव

हर जाति में युवा प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी गई है। इन 53 सीटों पर पिछली बार के सिर्फ दो ही चेहरे हैं। बाकी सब जगह प्रत्याशी बदल दिए गए हैं। युवाओं को तरजीह की दो वजहें हैं। पहली तो यह कि युवा वोटरों की संख्या भी काफी ज्यादा है। युवाओं के पार्टी में जुड़ने से एक नया उत्साह आएगा। वहीं जानकारों का कहना ये भी है कि पार्टी के पास पुराने कद्दावर चेहरे बचे भी नहीं हैं जो चुनाव जिताकर ला सकें। ऐसे में प्रत्याशी तो बदलने ही थे। इस वजह से युवाओं पर दांव लगाना ज्यादा बेहतर है। पहले  चरण की सीटों में पश्चिमी यूपी के साथ ही ब्रज का क्षेत्र भी पड़ता है। ऐसे में ब्रज क्षेत्र में ओबीसी चेहरों में यादव, लोध और जाट प्रत्याशियों  को टिकट दिया गया है। वहीं दूसरे क्षेत्र में जाट और गुर्जर प्रत्याशियों को टिकट दिया गया है।

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बीएसपी प्रत्याशियों की लिस्ट

कैराना-राजेंद्र सिंह उपाध्याय, शामली-विजेंद्र मलिक, बुढ़ाना-हाजी मोहम्मद अनीश, चरथावल -सलमान सईद, पुरकाजी – सुरेंद्र पाल सिंह, मुजफ्फरनगर – पुष्पांकर पाल,खतौली – माजिद सिद्दीकी, मीरापुर – मोहम्मद शालिम,सिवालखास – मुकर्रम अली उर्फ नन्हे खां, सरधना – संजीव कुमार धामा, हस्तिनापुर – संजीव कुमार जाटव,किठौर – कुशल पाल मावी उर्फ केपी मावी,मेरठ कैंट – अमित शर्मा,मेरठ दक्षिण – कुंवर दिलशाद अली, छपरौली – मोहम्मद शाहिन चौधरी, बड़ौत – अंकित शर्मा, लोनी-हाजी आकिल चौधरी, मुरादनगर- हाजी अय्यूब इदरीषी, गजियाबाद-सुरेश बसंल, मोदीनगर- पूनम गर्ग, धौलाना-वासिद प्रधान, हापुड़-मनीष कुमार सिंह, गढ़मुक्तेश्वर- मोहम्मद आरिफ,नोएडा-कृपाराम शर्मा, दादरी-मनवीर सिंह भाटी, जेवर-नरेन्द्र भाटी, सिकन्दराबाद- चौधरी मानवीर सिंह, स्याना-सुनील भारद्वाज, अनूपशहर-रामसिंह लोधी, डिबाई-करनपाल सिंह, शिकारपुर-मोहम्मद रफीक, खुर्जा-विनोद कुमार जाटव, खैर- प्रेमपाल सिंह जाटव, बरौली-नरेन्द्र शर्मा, अतरौली-ओमवीर सिंह, छर्रा-तिलकराज यादव, कोल-मोहम्मद बिलाल, अलीगढ़-रजिया खान, इगलास- सुशील कुमार जाटव, छाता-सोनपाल सिंह, मांट-श्याम सुंदर शर्मा, गोवर्धन-राज कुमार रावत, मथुरा-जगजीत चौधरी, बलदेव-अशोक कुमार, एत्मादपुर-सर्वेश बघेल, आगरा-भारतेन्दु अरूण, आगरा दक्षिणी-रवि भारद्वाज, आगरा उत्तरी-मुरारी लाल गोयल, आगरा देहात- किरन प्रभा केसरी, फतेहपुर सीकरी-मुकेश कुमार राजपूत, खेरागढ़-गंगाधर सिंह कुशवाहा, फतेहाबद-शैलेन्द्र प्रताप सिंह, बाह-नितिन वर्मा

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