मायावती ने कहा कि उचित समय पर दिया जाएगा चुनाव लड़ने का मौका कहा, सीधे चुनाव लड़े बिना भी संभाल सकती हूं सत्ता की बागडोर, बताई चुनाव न लड़ने की वजह
ऊषा सिंह
लखनऊ। बीएसपी प्रमुख मायावती ने शनिवार को कहा कि वह अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी में और आगे बढ़ाऊंगी। उचित समय आने पर चुनाव लड़ने का मौका भी दिया जाएगा। उन्होंने खुद के चुनाव लड़ने के बारे में साफ किया कि संविधान में अप्रत्यक्ष चुनाव की भी व्यवस्था है। विधान परिषद से जाकर कोई भी मुख्यमंत्री और राज्य सभा से प्रधान मंत्री बन सकता है। मुझे पुरा भरोसा है कि 2007 की तरह पूर्ण बहुमत की बीएसपी की सरकार बनेगी और मैं सीधे चुनाव लड़े बिना भी सत्ता की बागडोर संभाल सकती हूं। इसकी प्रदेश को सख्त जरूरत भी है। उन्होंने अपने चुनाव न लड़ने की वजह भी बताई। कहा कि जब तक कांशीराम स्वस्थ थे, वह पार्टी के बाकी काम संभालते थे और मैं चुनाव लड़ती थी। लगातार चुनाव जीतती भी रही। उनके बाद पार्टी की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई।
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अन्य युवाओं को भी मिलेगा मौका
मायावती ने कहा कि मेरे चुनाव लड़ने या न लड़ने को भी बार-बार उछाला जाता है। ऐसा इंप्रेशन भी दिया जाता है कि जैसे मैं कोई चुनाव लड़ी ही नहीं। मालूम होना चाहिए कि चार बार लोकसभा और तीन बार राज्य सभा सांसद रह चुकी हूं। इसके अलावा दो बार विधान सभा और दो बार विधान परिषद सदस्य रही हूं। हमारे संविधान में अप्रत्यक्ष चुनाव की भी व्यवस्था है। कोई भी राज्य सभा सदस्य प्रधानमंत्री बन सकता है और विधान परिषद सदस्य मुख्यमंत्री बन सकता है। उन्होंने कहा कि आकाश आनंद के चुनाव लड़ने को लेकर भी तरह-तरह की बातें होती हैं। आकाश ने अभी ने जल्दी ही राजनीति में प्रवेश किया है। वह अपने आप को तैयार कर रहे हैं। मेरे चुनावी राज्यों में व्यस्त होने के कारण मेरे निर्देश पर वह पूरे देश में पार्टी को मजबूत कर रहे हैं। इनको भी मेरे परिवार के साथ जोड़ दिया जाता है। मैं बता दूं कि मेरा अपना कोई परिवार नहीं है। पार्टी के अंदर और भी हजारों नौजवान लड़के-लड़कियां काम कर रही हैं। वे भी मेरे भतीजे और भतीजी ही हैं।
कपिल मिश्र भी पार्टी में नौजवानों को जोड़ने का काम कर कर रहे हैं। मुझे भरोसा है कि इन हजारों नौजवानों के प्रयास से पार्टी एक बार फिर 2007 की तरह पूरे बहुमत के साथ सत्ता में आएगी। सारे ओपीनियन पोल धरे रह जाएंगे।
सपा ने टिकट बंटवारे में की मुसलमानों की उपेक्षा
बीएसपी प्रमुख ने समाजवादी पार्टी और उसमें शामिल होने वाले नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ये दलबदलू समाजवादी पार्टी को अम्बेडकरवादी पार्टी बता रहे हैं, उसमें बिल्कुल सच्चाई नहीं है। ये वही समाजवादी पार्टी है जिसने सरकारी नौकरियों में पदोन्नतियों में आरक्षण के विधेयक को फाड़कर फेंक दिया था और पास नहीं होने दिया था। ये कैसे दलित हितैषी पार्टी हो सकती है। इसी पार्टी ने संत रविदास के नाम पर रखे गए भदोही जिले के नाम को फिर से बदल दिया था। सत्ता में रहते हुए सपा ने पिछड़ा वर्ग में सिर्फ अपने यादव समाज का ही ध्यान रखा। बाकी पिछड़ी जातियों का नहीं। वहीं बीएसपी ने दलितों के साथ यादव सहित सभी पिछड़ी जातियों का ध्यान रखा। इसी तरह सपा ने अपने शासन में हिंदू मुसलमान दंगे कराकर भाईचारे को तोड़ा। चुनावों में भी मुसलमानों का वोट तो लिया तो जोड़ा लेकिन टिकट देने और सरकार में भागेदारी देने में उनकी उपेक्षा की। इस बार भी सपा प्रत्याशियों की जो पहली लिस्ट आई है, उसमें भी उपेक्षा की गई है।
बीएसपी में खुली स्वामी की किस्मत
उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान का जवाब देते हुए कहा कि वह क्या किसी को मुख्यमंत्री बनाएंगे। पहली बार उनकी किस्मत ही बीएसपी में आकर खुली। उससे पहले कई दलों में रहे लेकिन कभी विधायक तक नहीं बन पाएं। भाजपा ने उनको पांस साल ढोया। उनको बीजेपी वाले समझाते रहे लेकिन वह नहीं माने। जब आप अमबेडकरवाद की बात करते हैं तो उनको समझना भी जरूरी है। अम्बेडकर किसी जाति और समाज के खिलाफ नहीं थे। वह समतामूलक समाज के पक्षधर थे।
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पुस्तक का विमोचन
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ही मायावती ने अपनी पुस्तक ‘मेरे संघर्षमय जीवन का सफरनामा और बीएसपी मूवमेंट’ के 17 वें अंक के हिंदी और अंग्रेजी संस्करणों का विमोचन भी किया। इससे पहले उन्होंने अपने आवास पर अपना जन्मदिन परिवार के सदस्यों और पदाधिकारियों के साथ मनाया। इस मौके पर उनके भाई आनंद कुमार, भतीजे आकाश और राष्ट्रीय महासचिव सहित कई पदाधिकारी मौजूद थे। सभी ने उनको बधाई दी।

