लखनऊः यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सियासत में मची भागदौड़ से सर्दी में गर्मीं बढ़ गई है। यूपी बीजेपी के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह के इस्तीफे के बाद बीजेपी अभी बैकफुट पर दिखाई दे रही है। स्वामी प्रसाद मौर्य के बीजेपी छोड़ने के बाद एमपीएमएलए कोर्ट ने एक पुराने मामले में वारंट भेजा है। वारंट के मामले पर सपा नेता आईपी सिंह ने ट्विट कर लिखा यह स्वामी प्रसाद मौर्य का अरेस्ट वारंट नहीं हैं, यह बीजेपी अपनी सरकार का डेथ वारंट जारी किया है।
आपको बता दें कि, स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद बीजेपी से मंत्री दारा सिंह ने भी पद से इस्तीफा दे दिया है। वहीं राजभर ने एक प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि अभी बीजेपी के कई मंत्री सपा में शामिल हो सकते हैं।
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आईपी सिंह ने ही कराया था योगी का रिटर्न टिकट
समाजवादी पार्टी के नेता और कभी भाजपा के प्रवक्ता रहे आईपी सिंह ने सीएम योगी आदित्यनाथ का 11 मार्च को गोरखपुर का टिकट बुक कराया था। सपा नेता आईपी सिंह ने की फोटो शेयर करते हुए उसका कैप्शन लिखा था कि ’10 मार्च जनता का दिन होगा, 10 मार्च प्रदेश में सच्चाई का सूरज निकलेगा और सपा प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। इसलिए मैंने @myogiadityanath जी के लिए लखनऊ से गोरखपुर का 11 मार्च का रिटर्न टिकट बुक कर दिया है। यह टिकट सम्भाल कर रखिए, क्यूँ कि BJP भी नहीं पूछेगी आपको हार के बाद।’ आईपी सिंह ने टिकट बुक कराने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ पर वार किया है साथ ही भाजपा को भी निशाने पर लिया है।
कौन हैं आईपी सिंह
आईपी सिंह छात्रजीवन से एबीवीपी के कार्यकर्ता रहे और बाद में भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता भी बने। आईपी सिंह लगातार दावा करते रहे हैं कि वो लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा में भी उनके साथ रहे। यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद आईपी सिंह उनके काम करने के तरीके से नाराज रहने लगे। गाहे-बगाहे वो भाजपा पर ही निशाना साधने लगे थे। जब भाजपा ने सोशल मीडिया पर मैं भी चौकीदार का कैंपेन चलाया तो उन्होंने इसका भी विरोध किया और लिखा मैं भी उसूलदार। हालांकि भाजपा ने इन पर कोई कार्रवाई नहीं की। आईपी सिंह अपनी तीखी बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं और भाजपा में रहते हुए मोदी और योगी पर निशाना साधते रहे। इस बीच 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने आजमगढ़ से दावेदारी ठोंकी तो इसका खुलकर आईपी सिंह ने समर्थन किया। चूंकि, आजमगढ़ उनका गृह जनपद है और उन्होंने अपने घर पर अखिलेश यादव को कार्यालय बनाने का ऑफर दे दिया। उनके इस बयान पर बीजेपी सख्त हुई और उन्हें छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया। उसके बाद आईपी सिंह सपा में शामिल हो गए। जिसके बाद अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी का प्रवक्ता बना दिया है।

