अंकिता भंडारी हत्याकांड: बिना जनाधार पिता विनोद और बडा़ भाई अंकित चढ़ते गए सियासी पायदान,ऋषिकेश से देहरादून तक थी हनक

उत्तराखंडअंकिता भंडारी हत्याकांड: बिना जनाधार पिता विनोद और बडा़ भाई अंकित चढ़ते...

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ऋषिकेश। अंकिता भंडारी हत्या के मुख्य आरोपी पुलकित आर्य की गिरफ्तारी के बाद मामले से पल्ला झाड़ते हुए उत्तराखंड भाजपा ने उसके पिता विनोद आर्य और बड़े भाई अंकित आर्य को पार्टी से निष्कासित कर दिया। पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अंकित को उत्तराखंड ओबीसी आयोग उपाध्यक्ष पद से हटा दिया। अंकिता ने पिछले महीने के अंत में पुलकित के रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करना शुरू किया था। वह 18 सितंबर को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई थी।  रिपोर्ट के मुताबिक पिछली त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में राज्यमंत्री के पद का सुख भोगने वाले विनोद आर्य को कभी एक जन नेता नहीं माना जाता था। उसका कोई उल्लेखनीय समर्थन आधार नहीं था। लेकिन विनोद आर्य अपने प्रभाव का उपयोग वरिष्ठ भाजपा नेताओं से निकटता हासिल करने के लिए किया। भाजपा की राज्य ईकाई में कई लोगों का मानना ​​है कि हरिद्वार के रहने वाले विनोद आर्य को मुख्य रूप से स्वदेशी आयुर्वेद में उनकी व्यावसायिक रुचि के लिए भाजपा में शामिल किया गया। बाद में, भाजपा सरकार ने विनोद आर्य को राज्यमंत्री का दर्जा दिया और उत्तराखंड माटी बोर्ड का अध्यक्ष बना दिया।

राज्य के एक भाजपा नेता के हवाले से कहा गया है कि विनोट आर्य कभी जननेता नहीं रहे। वह पार्टी के लिए कभी भी वोट नहीं लाए। विनोद आर्य क्षेत्र में स्वदेशी आयुर्वेद फर्म चलाने कका काम करता था। यही कारण है कि पार्टी का मानना ​​​​था कि स्वदेशी टैग वाला व्यक्ति होना अच्छा होगा। पार्टी में आने के बाद उन्होंने अलग पदों पर दावेदारी ठोकनी शुरू कर दी थी। बैठकों में वह कहते थे कि वह वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें उपयुक्त मान्यता दी जाए। इसके साथ, उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया।  विनोद ने बाद में अपने राजनीतिक प्रभाव का उपयोग अपने आयुर्वेद व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए भी किया। लक्ष्मण झूला क्षेत्र में पुलकित के वनंतरा रिजॉर्ट को इस संबंध में उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। विनोद के बड़े बेटे अंकित भाजपा में शामिल हुए और बाद में उसको भी राज्य ओबीसी आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया। राजनीतिक हलकों में माना जाता है कि चूंकि विनोद भगवा पार्टी में सिर्फ एक प्रतीकात्मक चेहरा रहा था। इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई करना मुश्किल नहीं था। अंकिता भंडारी हत्याकांड ने बड़े पैमाने पर जन आक्रोश को जन्म दिया है। इसलिए अंकिता का शव मिलने के तुरंत बाद, भाजपा ने सबसे पहले विनोद और अंकित दोनों पर कार्रवाई की। सीएम धामी ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठन का आदेश दिया। यहां तक ​​​​कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने घोषणा की कि आरोपियों पर गैंगस्टर अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ है। प्रशासन ने वनंतरा रिजॉर्ट के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया। जिसने आरोपों के बीच विवाद को जन्म दिया कि यह कार्रवाई महत्वपूर्ण सबूतों को ‘नष्ट’ करने को की गई। हालांकि इन आरोपों का पुलिस ने खंडन किया। डीजीपी अशोक कुमार और एसआईटी प्रमुख डीआईजी पी रेणुका देवी ने खुद ही आगे आकर कहा कि पिछले गुरुवार को विस्तृत वीडियोग्राफी के बाद रिजॉर्ट सील कर दिया गया था।

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