अमित बिश्नोई
बॉलीवुड की अभिनेत्री, पीएम मोदी जी की बड़ी वाली फैन और फिर उनकी कृपा से मंडी से सांसद बनकर संसद पहुँचने वाली कंगना रनौत इन दिनों बड़ी चर्चा में हैं, लेकिन ऐसी चर्चाओं से चर्चित हैं जिनकी वजह से हरियाणा में सत्ता बचाने के लिए संघर्ष कर रही भाजपा चिंतित है. कंगना की पहचान हमेशा से एक मुंह फट अभिनेत्री के रूप में रही है, बॉलीवुड की बड़ी हस्तियों से पंगे लेना उनकी आदतों में शुमार है लेकिन उनके मुंह फट होने की आदत से भाजपा को शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है. लाख समझाए जाने के बावजूद कंगना चुप होने का नाम नहीं ले रही हैं, वो जब भी मुंह खोलती हैं एक विवाद खड़ा कर देती हैं विशेषकर किसानों को लेकर उनके दिए गए बयानों से भाजपा को समस्या का सामना करना पड़ता है, अभी ताज़ा बयान उन्होंने कृषि कानूनों की वापसी को लेकर दिया। हरियाणा विधानसभा चुनाव के माहौल में उनका ये बयान भाजपा के लिए बड़ा भारी पड़ सकता है, मजबूरन उसे कंगना के बयान से खुद को अलग करना पड़ा लेकिन इससे कोई फायदा नहीं हुआ, जो सन्देश जाना था वो चला गया. कंगना को एकबार फिर फटकार पड़ी और उन्हें तब एहसास हुआ कि वो एक अभिनेत्री ही नहीं एक राजनेता भी हैं और उन्हें कुछ भी बोलने से पहले सोच समझ लेना चाहिए, उन्होंने अपने शब्दों को वापस ले लिया लेकिन कमान से निकला हुआ तीर और मुंह से निकले हुए शब्द वापस नहीं आते.
मंडी से सांसद बनने से पहले कंगना रनौत ने बहुत से ऐसे बयान दिए जो विवाद का विषय बने, यहाँ तक कि उन्हें ट्विटर (अब एक्स) ने प्रतिबंधित भी कर दिया था, लेकिन पहले वो सिर्फ एक अभिनेत्री और मोदी जी की बड़ी वाली फैन थीं, ऐसी फैन जो 2014 में देश के आज़ाद होने की बात करती थी, सुभाष चंद्र बोस को देश का पहला प्रधानमंत्री मानती थी. पहले लोग कंगना रनौत को और उनकी बातों को मज़े के रूप में लेते थे, मीडिया वाले मिर्च मसाले वाली खबर चलाने के लिए कंगना से बात करते थे, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से कोई नहीं लेता था लेकिन कंगना अब एक लॉ मेकर भी हैं. संसद में कानून बनाने में उनकी भी भूमिका है, चूँकि वो सत्ताधारी पार्टी की सांसद हैं तो ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, ऐसे में किसी नीतिगत मुद्दे पर अगर वो कोई बात कहती हैं या बयान देती हैं तो सिर्फ उनका व्यक्तिगत बयान नहीं माना जा सकता। सत्ताधारी दल या गठबंधन का सांसद होने के नाते वो सरकार का पक्ष माना जायेगा। इसलिए अगर वो ये कहती हैं कि किसानों को खुद तीनों कृषि कानून वापस लाने की मांग करनी चाहिए जो डेढ़ साल चले किसान आंदोलन और सैकड़ों किसानों की शहादत के बाद मजबूर होकर और मन मसोसकर और ये कहते हुए कि प्रधानमंत्री मोदी ने वापस लिए कि उनकी तपस्या में कोई कमी रह गयी होगी.
लोगों को हैरानी हुई कि ऐसे समय में जब हरियाणा में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं और किसान आंदोलन अभी भी जारी है और चुनाव में एक बड़ा मुद्दा भी है जो सत्ताधारी भाजपा सरकार को विचलित किये हुए है, कंगना रनौत इस तरह का बयान क्यों दे रही रही हैं जो किसानों के ज़ख्मो को कुरेदे। यही नहीं वो किसान आंदोलन को पंजाब का आंदोलन बताकर किसानों में फूट डालने की कोशिश भी करती हैं. अब कंगना के मुंह से ये शब्द अनायास ही निकल गए या फिर कहीं से उन्हें ये बयान देने के लिए कहा गया. क्योंकि भाजपा की अगर कार्यशैली देखी जाय तो वो ऐसी ही है कि प्रयोग के तौर पर वो कोई शगूफा छोड़ती है और फिर उसका रिएक्शन देखती है. उस रिएक्शन को देखकर वो आगे की रणनीति बनाती है। अब कंगना के मुंह से कोई शगूफा छोड़ा गया या फिर ये कंगना का अपना कर्मकांड था इसके बारे में दावे के साथ तो कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन कंगना के इस बयान के बाद कंगना को इनाम ज़रूर मिला इसमें भी कोई दो राय नहीं हैं. अब किसी को इनाम किस लिए दिया जाता है, ये सभी को मालूम है. कंगना रनौत के इस कर्मकांड के बाद उन्हें आज गठित हुई संसदीय स्थायी समितियों में से एक संचार और आईटी समिति में जगह ज़रूर मिल गयी. अब इसे कंगना का प्रमोशन ही कहा जाएगा। इस प्रमोशन से उन सवालों को भी बल मिलता है कि किसान बिल वापसी वाले शब्द कंगना के मुंह से कहलवाए गए थे. खैर अगर वो शब्द कंगना के मुंह से कहलवाए गए तो किसने कहलवाए और क्यों कहलवाए ये एक जटिल पहेली ही कही जायेगी क्योंकि इन शब्दों से हरियाणा चुनाव में भाजपा को कोई फायदा तो हरगिज़ नहीं मिलेगा इतना तो पक्का है।
वैसे कंगना ने किसानों को लेकर कोई पहला बयान नहीं दिया है इससे पहले भी वो बयान दे चुकी हैं और डांट भी खा चुकी हैं, एकबार नहीं कई बार और ये बात उन्होंने एक इंटरव्यू में कही भी थी कि डांट खाने के बावजूद वो भूल जाती हैं कि वो अब सिर्फ अभिनेत्री नहीं बल्कि एक सांसद भी हैं और उनकी बातों के राजनीतिक मतलब होते हैं, तो क्या कंगना थोड़ा झक्की हैं जो सनक में लगातार ऐसी बातें बोलती रहती हैं जो पार्टी को परेशानी में डाले। कुछ भी कहिये, कितनी भी टोकाटाकी कीजिये, कितनी भी डांट पिलाइये, कंगना नहीं सुधरने वाली। ताज़ा डांट के बाद अभी कुछ शांति है लेकिन ये शांति जल्दी ही भंग होगी, इसका पूरा यकीन है. आप कह सकते हैं विवादों के लिए कंगना रनौत का नाम ही काफी है.

