समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने बुधवार को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण श्रेणियों में उप-वर्गीकरण की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ बुलाए गए ‘भारत बंद’ को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि आरक्षण की रक्षा के लिए जन आंदोलन एक सकारात्मक प्रयास है और यह शोषितों और वंचितों में नई चेतना पैदा करेगा।
अखिलेश ने भारत बंद को समर्थन देते हुए अपने सोशल प्लेटफॉर्म पर आरक्षण की रक्षा के लिए जन आंदोलन को एक सकारात्मक प्रयास बताया कर कहा कि यह शोषितों और वंचितों में नई चेतना पैदा करेगा और आरक्षण के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ के खिलाफ जनशक्ति का कवच साबित होगा। शांतिपूर्ण आंदोलन एक लोकतांत्रिक अधिकार है।” अखिलेश यादव ने कहा कि अगर सरकार घोटालों और कांडों के जरिए संविधान और लोगों के अधिकारों से छेड़छाड़ करती है तो जनता को सड़कों पर उतरना होगा। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने पहले ही चेतावनी दी थी कि संविधान तभी काम करेगा जब इसे लागू करने वालों की नीयत सही होगी।
उन्होंने कहा कि जब सत्ता में बैठी सरकारें धोखाधड़ी, घोटाले और घपलों के जरिए संविधान और उसके द्वारा दिए गए अधिकारों से छेड़छाड़ करेंगी तो जनता को सड़कों पर उतरना ही पड़ेगा। अखिलेश ने कहा कि जनांदोलनों से ही बेलगाम सरकार पर लगाम लगती है।
बता दें कि आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में आज एक दिन के भारत बंद का एलान किया है। पूरे देश में इसे काफी समर्थन मिल रहा है. अखिलेश के अलावा बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने भी भारत बंद को अपना समर्थन दिया है। बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि इन समूहों के लोगों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ गुस्सा और आक्रोश है। मायावती ने भी अखिलेश की तरह अपने अपने सोशल प्लेटफॉर्म पर कही है. मायावती ने भारत बंद का समर्थन करते हुए कहा कि एससी/एसटी और क्रीमी लेयर के उप-वर्गीकरण के बारे में शीर्ष अदालत के फैसले के खिलाफ गुस्सा और आक्रोश है, उन्होंने कहा कि बीजेपी और कांग्रेस जैसी पार्टियां आरक्षण के खिलाफ साजिश कर रही हैं और इसे अप्रभावी और समाप्त करने के लिए वो मिली हुई हैं.

