नौकरी ही नौकरी: क्या बैकफुट पर है मोदी सरकार?

आर्टिकल/इंटरव्यूनौकरी ही नौकरी: क्या बैकफुट पर है मोदी सरकार?

Date:

अमित बिश्‍नोई

सिर्फ चार दिन के युवा विद्रोह के आगे केंद्र की मज़बूत सरकार नतमस्तक नज़र आ रही है. सिर्फ एक दो नहीं केंद्र के कम से कम 6 मंत्रालयों ने आज इन भावी अग्निवीरों के लिए नौकरियों के मौके खोल दिए हैं, भाजपा शासित राज्यों ने प्राथमिकताओं की जो घोषणाएं की हैं वो अलग. अब तो ऐसा लग रहा है कि नौकरियां ज़्यादा खुल जाएँगी और लेने वाले कम पड़ जायेंगे

बता दें कि आज सुबह ही गृह मंत्रालय ने भावी अग्निवीरों के लिए गृह मंत्रालय ने 10 प्रतिशत के आरक्षण का एलान किया, अब रक्षा मंत्रालय कैसे पीछे रहता, उसने भी 10 प्रतिशत दे दिया। 20 प्रतिशत आरक्षण होने के बाद भी सरकार ने सोचा कि युवा बहुत भड़का हुआ है, यह सिर्फ इतने से ही शांत नहीं होगा, फिर इसके बाद केंद्र के अन्य मंत्रालयों से भी बयान आने लगे कि हम भी अग्निवीरों को नौकरियों में देंगे प्राथमिकता। आखिर मोदी जी के सम्मान की बात है, कृषि कानूनों पर तो अपमान का घूँट सह लिया लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। योजना तो यह लागू ही होगी भले ही इसके लिए कितनी ही घोषणाएं करनी पड़ें। 

Read also: Agnipath Scheme Protest In UP: ‘अग्निपथ’ के विरोध में रालोद के समर्थन में उतरा युवाओं का हुजूम

तो जनाब फिर क्या था वित्त मंत्रालय, पोत परिवहन मंत्रालय, आवास एवं पेट्रोलियम मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालयों ने भी कहा हम भी अग्निवीरों का अपने मंत्रालयों में अग्निवीरों का स्वागत करेंगे, उन्हें सेवा का अवसर देंगे, उनके कौशल का लाभ उठाएंगे, हालाँकि इन मंत्रालयों ने 10 प्रतिशत आरक्षण जैसी कोई बात नहीं कही ताकि बाद में कुछ ऊंच नीच हो तो कहा जा सके कि हमने तो संख्या के बारे में कुछ भी नहीं कहा था.

सरकार की अग्निपथ योजना पर देश का युवा जिस तरह अग्निवीर के रूप क्रांतिवीर बन गया, सरकार का घबराना लाज़मी है, दिलचस्प बात यह है कि युवाओं की इस अग्निवीरता का सबसे ज़्यादा शिकार भाजपा शासित राज्य ही हो रहे हैं और शायद यही वजह है कि भाजपा शासित राज्य जहाँ पर भर्तियों के टोटे पड़े हुए हैं अग्निवीरों को एडजस्ट करने की बाते करने लगे हैं, बातें क्या वादा करने लगे हैं, उधर उनके राज्य के पुलिस फाॅर्स के आला अफसर हैरान हो रहे हैं कि यह सब होगा कैसे? वह शायद भूल रहे हैं कि यह सारे वादे चार साल बाद के लिए हैं. किसानों ने डेढ़ साल आंदोलन चलाया, कानून वापसी का झुनझुना थमा दिया गया, अब उसी के साथ वो खेल रहे हैं, क्या अब वो फिर से एकजुट हो पाएंगे, शायद मरते दम तक नहीं। 

इन युवाओं के लिए भी नौकरियों के ऑफरों की बरसात भी किसी झुनझुने से कम नहीं है और फिर इन मंत्रालयों में, राज्य की फ़ोर्स में अग्निवीर ही भरे जायेंगे तो फिर अब हर युवा अग्निवीर बनने के लिए भागेगा और भर्तियां कितनी हैं? सिर्फ 46 हज़ार। आंदोलित युवाओं को सरकार के यह ऑफर अगर समझ में भी आ गए तो सोच लीजिये कि इन 46000 भर्तियों के लिए क्या भगदड़ मचने वाली है. सरकार ने इन भावी अग्निवीरों के साथ नौकरी नौकरी का जो खेल शुरू किया है दरअसल यह सिर्फ अपनी इज़्ज़त बचाने की कोशिश है जो किसान आंदोलन के समय तार तार हो गयी थी और प्रधानमंत्री जी को सामने आकर कहना पड़ा था कि हम अपने किसान भाइयों को कृषि कानूनों के फायदे समझाने में नाकाम रहे. प्रधानमंत्री नहीं चाहते कि उन्हें देश के सामने एकबार अपनी वो बात दोहरानी पड़े. 

Read also: Agneepath Scheme Updates Live: अग्निपथ योजना को समझाने सामने आये सेना के आला अधिकारी

भाजपा सांसद वरुण गाँधी ने आज सवाल भी किया है कि आखिर सिर्फ चार दिनों में ही इतने बड़े बदलाव क्यों? शायद मामला पहले प्रहार और फिर विचार जैसा है, यानी बिना सोचे समझे लाई गयी योजना। वरुण गाँधी कहा कि कोई भी संवेदनशील सरकार देश की सेना, सुरक्षा और युवाओं के भविष्य को लेकर ऐसे फैसले नहीं करती। यह सिर्फ वरुण गाँधी के ही विचार नहीं हैं, भाजपा में कई ऐसे हैं लेकिन सार्वजानिक रूप से मुंह नहीं खोलते, वरुण की बात अलग है. वरुण गाँधी के सवाल से एक सवाल तो निकलता ही है कि क्या यह मोदी सरकार का एक और बैकफुट है?

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

सोशल मीडिया से आतंक की साजिश तक! कासगंज में ATS का शिकंजा, 18 वर्षीय युवक गिरफ्तार

जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध आतंकी के संपर्क में होने...