नए पड़ोसी पर भारत की कड़ी नज़र

आर्टिकल/इंटरव्यूनए पड़ोसी पर भारत की कड़ी नज़र

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अमित बिश्‍नोई

हमारे देश में एक बात प्रचलित है कि अगर आपका पड़ोसी अच्छा है तो आपके शांतिप्रिय जीवन की 50 प्रतिशत की गारंटी निश्चित है, शायद इसीलिए हर कोई चाहता है कि रिश्तेदार अच्छे मिलें न मिलें मगर पड़ोसी ज़रूर अच्छा होना चाहिए। हम हमेशा अच्छे पड़ोसी की कामना करते हैं. पड़ोसी अच्छा मिला तो सौभाग्य, खराब मिला तो दुर्भाग्य क्योंकि ख़राब पड़ोसी वह समस्या है जो न चाहते हुए भी आपको समस्याओं से ग्रसित रखता है। यहाँ बात हो रही है अफ़ग़ानिस्तान की जहाँ अब तालिबान हमारा पड़ोसी बन चूका है. ज़ाहिर सी बात है कि भारत के लिए यह एक चिंता की बात है क्योंकि तालिबान का नाम आते ही एक क्रूर चेहरा सबके सामने नज़र आने लगता है।

भारत पहले ही पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसियों की नापाक हरकतों से लगातार मुकाबला कर रहा है और अब उसे आतंकी संगठनों से सांठगांठ रखने वाला तालिबान रुपी एक और खतरनाक पड़ोसी मिल गया. अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की पुनर्स्थापना से भारत का चिंतित होना इसलिए भी लाज़मी है कि उसकी सीमाएं देश के उस संवेदनशील हिस्से से मिलती हैं जहां हमेशा आतंकी सक्रिय रहते हैं, रोज़ाना ही सुरक्षा बलों से मुठभेड़ें होती हैं।

तालिबान शासित अफगानिस्तान दुनिया का पहला आतंकवादी राष्ट्र बन जाएगा?

विश्व पटल पर एक बड़ी शक्ति के रूप में उभरते भारत को चीन अपना सबसे बड़ा खतरा मानता है, पाकिस्तान से चीन के पहले ही मधुर सम्बन्ध हैं क्योंकि दोनों भारत को अपना दुश्मन नंबर एक मानते हैं. और अब अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान? एक ऐसे त्रिकोण का निर्माण जो भारत के लिए काफी परेशानी खड़ी कर सकता है, भौगोलिक परिस्थितियां भी उनके लिए काफी मददगार हैं. पाकिस्तान ने तो वैसे भी तालिबान को हमेशा स्वीकारा है, तालिबान भी पाकिस्तान को अपना दूसरा घर बताता है, इन दोनों को दुनिया की एक महाशक्ति चीन का भी साथ एक खतरनाक गठजोड़ का निर्माण कर रहा है, जो भारत के लिए तो समस्या है ही, सुपर पावर अमेरिका के लिए भी एक बड़ी वार्निग है. मत भूलिए कि पुतिन का झुकाव भी इस वक्त अफ़ग़ानिस्तान की मौजूदा शक्ति की ओर ही है।

वैचारिक और नैतिक रूप से भारत तालिबान जैसी ताकतों का हमेशा विरोधी रहा है, हालाँकि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की पुनर्स्थापना के बाद भारत ने अभी अपना कोई आधिकारिक स्टैंड क्लियर नहीं किया है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर आल पार्टी मीटिंग से भी जो बात निकलकर सामने आयी वह फिलहाल यही है कि वहां फंसे भारतीयों और गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय को निकालना पहली प्राथमिकता है हालाँकि गैर प्रामाणिक सूत्रों के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान से जुड़े कई अन्य गंभीर मुद्दों पर भी चर्चा हुई जो बंद कमरे तक ही सीमित हैं। अच्छी बात यह है कि पूरा विपक्ष अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर सरकार के साथ है.

अफ़ग़ानिस्तान पर भारत की वेट एंड वाच पालिसी की सबसे बड़ी वजह शायद यही होगी कि वह देखना चाहता है कि दुनिया के अन्य देश विशेषकर G-7 तालिबान की देखरेख में बनने वाली अफ़ग़ानिस्तान सरकार के साथ क्या रुख अपनाते हैं. इसके अलावा अफ़ग़ानिस्तान में ऐसे 300 से भी ज़्यादा प्रोजेक्ट हैं जिनमें भारत का हज़ारों करोड़ का निवेश है, ऐसे में जल्दबाज़ी में कोई भी क़दम उठाना ठीक नहीं होगा।

कभी रहे वांछित आतंकवादी, अब तालिबान 2021 के प्रमुख सदस्य हैं (पार्ट 1)

वैसे तो तालिबान-2 अपने को बदलने की बात कर रहा है, ‘मित्रता’ और ‘भाईचारे’ की बात कर रहा है, मगर बीस साल पहले अफ़ग़ानिस्तान के लोगों पर उसके द्वारा की गयी क्रूरता आज भी लोगों के मन मष्तिष्क में ज़िंदा है और इसका जीता जागता सबूत हवाईजहाज़ों के पंखों और पहियों से चिमटे हुए वह लोग हैं जो लाश के रूप में ज़मीन पर गिरते हैं, वह हर हाल में अफ़ग़ानिस्तान से निकलना चाहते थे. काबुल एयरपोर्ट पर रोज़ कई लोग जान गँवा रहे हैं फिर भी भीड़ है कि बढ़ती जा रही है, इस भीड़ को तालिबान-2 की बातों पर कतई भरोसा नहीं, इस भीड़ को मालूम है कि बीस वर्षों से जो आज़ाद ज़िन्दगी वह जी रहे थे वह अब ख़त्म हो जाएगी। महिलाओं को फिर घरों के अंदर ढकेल दिया जायेगा, बच्चों को फिर मदरसों की ओर मोड़ दिया जायेगा, बोलने और सुनने, उठने बैठने, खेलने कूदने, लिखने पढ़ने, हर तरह की आज़ादी को छीन लिया जायेगा।

अफ़ग़ानिस्तान में अभी आगे क्या होने वाला है? तालिबान का कौन सा रूप सामने आने वाला है? विश्व समुदाय तालिबान समर्थित या निर्मित सरकार पर क्या रुख अपनाने वाला है? काबुल एयरपोर्ट पर दाइश के आत्मघाती हमले के बाद अमरीका का अगला क़दम क्या होने वाला है? ऐसे बहुत से सवाल हैं जो आने वाले दिनों में हमें मिलेंगे। अगर हम बात केवल भारत की करें तो उसकी चिंता यह नहीं की तालिबान भारत को कुछ नुकसान पहुंचा सकता है. उसकी चिंता बस यही है कि क्षेत्र में शांति स्थापित हो और मानवता कुचली न जाए। दुश्मन से मुकाबला करना भारत को अच्छी तरह से आता है। यह बात पूरी दुनिया बहुत अच्छी तरह से जानती है. देश की सीमाएं पहले भी सुरक्षित थीं, आज भी सुरक्षित हैं और आगे भी सुरक्षित रहेंगी। ‘अफ़ग़ानिस्तान में किसकी सरकार बनती है, कौन सरकार बना रहा है यह बेशक उनका आंतरिक मामला है’ पर भारत की इस नए पड़ोसी पर कड़ी नज़र ज़रूर रहेगी।

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