कैंसर को मात नहीं दे सकी भारतीय शूटर

स्पोर्ट्सकैंसर को मात नहीं दे सकी भारतीय शूटर

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कैंसर को मात नहीं दे सकी भारतीय शूटर

नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी के बीच पिछले कुछ समय में भारत ने कई दिग्गजों को खोया है. खेल जगत को होने वाली इस क्षति में सोमवार को एक और नाम जुड़ गया. पूर्व भारतीय निशानेबाज और कोच पूर्णिमा जनाने का 42 साल की उम्र में निधन हो गया है. यह भारतीय राइफल शूटर पिछले दो साल से कैंसर से जंग लड़ रही थी. विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पूर्णिमा ने पुणे में अपनी आखिरी सांस ली.

दो साल पहले पता चला कैंसर से थी पीडि़त
पूर्णिमा वल्र्ड कप, एशियन चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्तव कर चुकी हैं. वह 10 मीटर एयर राइफल में लंबे समय तक नेशनल रिकॉर्डधारी रही थी. उनकी कामयाबियों के लिए महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें शिव छत्रपति स्पोट्र्स अवॉर्ड दिया था. नंदद में पैदा हुई पूर्णिमा ने मुंबई में अपने करियर की शुरुआत की और फिर वह पुणे चली गई. दो साल पहले केरल में हो रहे राष्ट्रीय खेलों के दौरान उन्हें पता चला कि वह कैंसर से पीडि़त हैं.

आखिरी दम तक कैंसर से लड़ती रही पूर्णिमा
पूर्णिमा ने भारत के लिए सैफ गेम्स, कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप और एशियन चैंपियनशिप में मेडल जीते थे. उस समय उन्हें भारतीय टीम का ही हिस्सा रही दीपाली देशपांडे, अंजलि भागवत और सुमा शिरूर से कड़ी टक्कर मिलती थी. साल 2012 में उन्हें अपने करियर को अलविदा कहा.

कोचिंग में जल्द मिलने वाला था ए लाइसेंस
हालांकि वह खेल से दूर नहीं हुई और साल 2014 में ऑस्ट्रिया के वल्र्ड चैंपियन खिलाड़ी फ्रैंक थॉमस के साथ कोचिंग करना शुरू किया. आईएसएसएफ ने पूर्णिमा को कोचिंग में बी लाइसेंस मिला था जो जल्द ही ए में बदलने वाला था. वह चौथे स्टेज तक पहुंच चुके कैंसर के खिलाफ भी आखिरी समय तक जंग लड़ती रही.

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